रविवार, 27 नवंबर 2011

बच्चा

बच्चा 
 वे  कहते है बच्चा ,
 हम में, तुम में कौन है? अच्छा..... 
 किलकारी मार कर हंसना है ,
 गोद में कभी नहीं आता हैं.....
अन्दर- अन्दर मुस्काता हैं ,
 तन का हैं कितना अच्छा .....
 मुस्काता है मन के अन्दर ,
 भेद भाव बिलकुल नहीं समझता.....
 लगा हैं लार चुवाने में ,
 कभी नहीं हम उसको लेते हैं.....
हमेसा  गोद को रोता हैं ,
  वे कहते हैं बच्चा ......

 लेखक - जीतेन्द्र कुमार
 कक्षा - ८ अपना घर ,कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर कविता ....

GYANDUTT PANDEY ने कहा…

आज लार चुआ रहा है, कल देश के आंसू पोछेगा!