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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

कविता : नदियों के बीच से आती वो

" नदियों  के  बीच से  आती वो "

 नदियों के  बीच से  आती वो।
किलकारिंयो भरी आवाज।।
भरी गोद , अब याद  आती है।
खिलखिलाहट भरी मुस्कान।।
 आती है वो पुरानी  साड़ी  का मखमल।
भरा वो आँचल।।
लोरिंयो से भरी  वो रात।
माँ की सिखायी हर बात।।
बहुत याद आती  है।
छोटे - छोटे पैरों से बने पद चिन्ह।।
बचपन की  करते शरारते।
ननिहाल में बिताये वो दिन।।
बहुत  याद आते है ,
नदियो के बीच से  वो। 
किलकारियों भरी अवाज।।

कविः राज कुमार ,कक्षा :11th , अपना घर, कानपुर 

मंगलवार, 19 अगस्त 2014

कविता: छुट्टी के दिन आई रे

छुट्टी के दिन आई रे  ...

आई रे आई रे आई रे
छुट्टी के दिन आई रे 
खेल कूद ले आई रे
मस्ती का दिन लाई रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे 
गाई रे गाई रे गाई रे
कोयल गीत गाई रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे 
पढाई से हो गई कुट्टी रे 
मार से मिली है छुट्टी रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे...
                                    कवि: देवा कुमार, कक्षा 4th, अपना घर, कानपूर