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गुरुवार, 9 मार्च 2017

कविता: मैंने देखा एक सपना


"मैंने देखा एक सपना"

जन्नत जैसा घर है अपना,
मैंने देखा रात को सपना |
सपने में एक चिड़िया आई, 
उसने बोला सुन मेरे भाई |
तोता आम है मीठा खाता ,
मुझको है बहुत ललचाता |
तब तक तोता उड़ कर आया ,
अपने साथ वो आम भी लाया |
तोते ने फिर मुझसे कहा ,
मै कभी न चुपचाप रहा  |
हरे रंग का है मेरा बाल ,
चोच मेरी है मिर्च सी लाल |
आओ आम मिलकर खाए ,
दोस्ती के हम गीत गाएँ|

                                                    कवि: समीर कुमार, कक्षा 6th, कानपुर


समीर कुमार (Sameer) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये उत्तर प्रदेश के इलहाबाद  के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. समीर यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 6th के छात्र है। समीर को गीत गाना और लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके आदर्श है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।


 



मंगलवार, 19 अगस्त 2014

कविता: छुट्टी के दिन आई रे

छुट्टी के दिन आई रे  ...

आई रे आई रे आई रे
छुट्टी के दिन आई रे 
खेल कूद ले आई रे
मस्ती का दिन लाई रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे 
गाई रे गाई रे गाई रे
कोयल गीत गाई रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे 
पढाई से हो गई कुट्टी रे 
मार से मिली है छुट्टी रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे...
                                    कवि: देवा कुमार, कक्षा 4th, अपना घर, कानपूर          


मंगलवार, 25 सितंबर 2012

शीर्षक :-मौसम

शीर्षक :-मौसम
मौसम सुहाना ,
मन   सुहाना ।
बदल को है आना ,
जल को है बरसाना।
मन को है  नहलाना ,
बरसात मौज मस्ती करना ।
दोस्तों को खुंशिया बाटना,
ये दिन हो अनमोल ।
इसका न कोई मोल ,
ये रतन बड़ा है अनमोल ।
नाम : हंसराज कुमार , कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर