हिंदी कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हिंदी कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 20 मार्च 2017

कविता: होली


"होली"

होली आई होली आई ,
रंगों की बरसात लाई |
तरह तरह के रंग लाई,
होली के रंग मुझको भाई |
पिचकारी से जब निकली होली,
ऐसा लगा बन्दूक से निकली गोली |
सुबह भूलो ,शाम को भूलो,
पर होली में रंग लगाना न भूलो |

बाल कवि: अजय कुमार,  कक्षा 2nd, कानपुर

 

अजय (Ajay) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के नवादा जिले के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. अजय यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 2nd के छात्र है। अजय को कविता लिखने में बहुत रूचि नहीं है, पर कभी-कभी लिख देते है। भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत बड़े फैन है| अजय को हँसना बहुत पसंद है, इसलिए इनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती है. उम्मीद है कि आपको इनकी होली पर लिखी कविता पसंद आएगी | 

शनिवार, 11 मार्च 2017

कविता: होली


"होली"

होली आया होली आया,
साथ में रंगों की गोली लाया |
दुश्मनी भूल हाथ मिलाया,
दुश्मनी को दूर भगाया |
जिन्दगी में खुशियाँ लाया,
दोस्तों को जलवा दिखाया|
अबीर लगा गले मिलाया,
रंगों के साथ खुद को भिगोया|
होली आया होली आया,
सबके दिल को बहलाया|

कवि: कामता, कक्षा 5th, कानपुर


कामता (KAMTA) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये बिहार के नवादा जिले के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. कामता यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 5th के छात्र है। कामता को कविता लिखने में बहुत रूचि नहीं है, पर कभी-कभी लिख देते है। भारतीय क्रिकेट टीम के बहुत बड़े फैन है | किताबें से बहुत दोस्ती है उनके बीच रहना अच्छा लगता है. हमें उम्मीद है कि आपको इनकी होली पर लिखी कविता पसंद आएगी | 

गुरुवार, 9 मार्च 2017

कविता: मैंने देखा एक सपना


"मैंने देखा एक सपना"

जन्नत जैसा घर है अपना,
मैंने देखा रात को सपना |
सपने में एक चिड़िया आई, 
उसने बोला सुन मेरे भाई |
तोता आम है मीठा खाता ,
मुझको है बहुत ललचाता |
तब तक तोता उड़ कर आया ,
अपने साथ वो आम भी लाया |
तोते ने फिर मुझसे कहा ,
मै कभी न चुपचाप रहा  |
हरे रंग का है मेरा बाल ,
चोच मेरी है मिर्च सी लाल |
आओ आम मिलकर खाए ,
दोस्ती के हम गीत गाएँ|

                                                    कवि: समीर कुमार, कक्षा 6th, कानपुर


समीर कुमार (Sameer) "अपना घर" परिवार के सदस्य है। ये उत्तर प्रदेश के इलहाबाद  के रहने वाले है। इनका परिवार ईट भठ्ठों में प्रवासी मजदूर का कार्य करते है. समीर यंहा "आशा ट्रस्ट" के कानपुर केंद्र "अपना घर" में रहकर, शिक्षा ग्रहण कर रहे है। वर्तमान में ये कक्षा 6th के छात्र है। समीर को गीत गाना और लिखना अच्छा लगता है। क्रिकेट के दीवाने है, विराट कोहली इनके आदर्श है। हमें उम्मीद है कि आपको इनकी ये नवीन रचना पसंद आएगी।