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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

छोटी सी चिड़िया बहुत कुछ कह जाती है।

" छोटी सी चिड़िया बहुत कुछ कह जाती है "

छोटी सी चिड़िया बहुत कुछ कह जाती है।

अपनी आवाजों से सबको मोह जाती है।।

छोटी  चिड़िया नजाने क्या क्या कह जाती है।

कभी इस डाल पे तो कभी उस डाल पे जाती है।।

चारो तरफ घूम - घूमकर कर खूब धूम मचाती है।

छोटी सी चिड़िया बहुत कुछ कह जाती है।।

छोटी सी चिड़िया जब आँगन में आती है।

चुन चुनकर दाने बच्चों को खिलाती है।।

 अपने भाव विचारो से सबको रिझाती है।

छोटी सी चिड़िया न जाने क्या - क्या कह जाती है।।

 कविः - शनि कुमार ,कक्षा -9th , अपना घर , कानपुर ,

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

मौसम मस्ताना हो चला है

" मौसम मस्ताना हो चला  है "
मौसम मस्ताना हो चला है।
बारिश  का स्तर बढ़ चला है।।
रिमझिम - रिमझिम बरस रहा है।
काली घटा का बवन्डर मड़रा रहा है।।
नदी तालाब सब भर चला है।
पूरे शहर में सड़कों पर पानी भर चला है।।
नदियों का स्तर बढ़ चला है।
किनारे पड़े घर फसल बह चला।।
 नदियों का स्तर बढ़ चला है ।
मौसम मस्ताना हो चला है।।
हर तरफ हरियाली  बढ़ चला है।।
मौसम मस्ताना हो चला है।
कविः - प्रांजुल कुमार ,कक्षा - 11th , अपना घर ,कानपुर ,

बुधवार, 21 अक्टूबर 2020

प्रकृति का मनमोहक नजारा


 

"प्रकृति का मनमोहक नजारा"

प्रकृति का मनमोहक नजारा।
मन करता है देखूँ दोबारा।।
इतना सुन्दर लगे इनका इशारा।
सभी की नजरें  अपनी ओर निहारा।।
सुनहरी सुबह से ढलती शाम तक ।
चमकते सूरज से चाँदनी रात  तक।।
एक - एक कण में दिया उजियारा।
मन करता है देखूँ दोबारा।।
पेड़ की टहनियों से आसमां की ऊंचाई तक ।
जमी से लेकर समुंद्र की गहरायी तक।।
छल -छल कल -कल आवाज दोहराया।
मन करता है देखू दोबारा ।।
प्रकृति का मनमोहक नजारा। 
कविः -प्रांजुल कुमार , कक्षा - 11th ,अपना घर ,कानपुर,
 
 

मंगलवार, 19 अगस्त 2014

कविता: छुट्टी के दिन आई रे

छुट्टी के दिन आई रे  ...

आई रे आई रे आई रे
छुट्टी के दिन आई रे 
खेल कूद ले आई रे
मस्ती का दिन लाई रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे 
गाई रे गाई रे गाई रे
कोयल गीत गाई रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे 
पढाई से हो गई कुट्टी रे 
मार से मिली है छुट्टी रे 
आई रे आई रे आई रे
छुट्टी का दिन आई रे...
                                    कवि: देवा कुमार, कक्षा 4th, अपना घर, कानपूर