कविता :धर्मेन्द्र बाल कविताएँ बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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शनिवार, 10 दिसंबर 2011

कविता : सर्दी

 सर्दी 
पड़ने लगी है अब सर्दी ,
सर्दी ने तो है हद कर दी.....
पड़ने लगा कोहरा अचानक,
दूसरे दिन से शुरु सर्दी भयानक ....
अब तो बस सबको भाई ,
 भाती है बस रजाई......
निकाल लिए हैं कपडें गरम,
कोई है गरम तो कोई नरम.......
ठंडे-ठंडे इस पाने से,
लगता है अब सबको डर....
लेकिन इसका उपयोग तो ,
होता है घर-घर  ......


लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9 
अपना घर 
 

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

कविता : जल

 जल 

जल से ही जीवन हमारा ,
उपयोग है बहुत इसका.....
इससे ही जीवन सबका,
उपयोग हैं करते हम जिसका,
गली,शहर,मुहल्लों में तो .....
बर्बाद होता है ये पानी ,
अब एक दिन येसा आयेगा....
जब खत्म हो जायेगी इसकी कहानी,
जल से ही है पेड़ों का जीवन ......
आक्सीजन हैं पाते जिससे,
काम बहुत आता है ये जल .....
जीवन हैं पाते हम जिससे ,

लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

रविवार, 7 अगस्त 2011

कविता : हमारा ब्रम्हाण्ड

कविता : हमारा ब्रम्हाण्ड

हमारा ब्रम्हाण्ड है बड़ा अनोखा,
गौर से नहीं इसको हमने देखा ....
क्या वहां पर भी होगा येसा जीवन,
कैसा होगा वहां का पर्यावरण ....
रात को हैं ये टिमटिमाते तारे ,
देखने में लगते हैं ये कितने प्यारे....
ब्रम्हाण्ड को जानने की बड़ी लालसा ,
चाँद पर जाने की है मेरी भी आशा .....
एक छोटा सा है संसार हमारा ,
कितना अच्छा है कितना प्यारा....
धरती हमारी सहती है कितना भार,
क्या सोंचा है कभी हमने एक बार ...
लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर


बुधवार, 13 जुलाई 2011

कविता : हमारे नेता

 हमारे नेता

ये देश फिर बढ़ रहा है गुलामीं की ओर ,
क्योंकि भ्रष्टाचार फैला है चारो ओर....
अब सब जनता इन लोगों से बेहाल ,
क्योंकि नेता अब बन गयें हैं चोर .....
अपनी बात को कहने से डरता है इंसान,
क्योंकि ये नेता हो गये हैं घूसखोर ....
बनकर नेता पैसे ये खूब कमाते ,
क्योंकि नेता से ये बन गये चोर ......

लेखक : धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा : 9
अपना घर

सोमवार, 28 मार्च 2011

कविता : जल

जल 
जल ही जीवन है हम सबका ,
इसका उपयोग करना हम सबका .....
कदापि न करें दुर्पयोग इसका ,
जल ही जीवन है हम सबका ....
एक-एक बूंद को बचाकर हम ,
जीवन को अत्यंत सुखी बनाएं .....
जल के दुर्पयोग को रोके हम ,
जीवन को हम आगें बढायें ....
जल का है यहाँ महत्त्व बड़ा ,
इसके द्रारा ही हम करते उधोग खड़ा ....
जल का हम सब करते उपयोग ,
इसलिए न करें इसका दुर्पयोग ......

लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : ८
अपना घर  

गुरुवार, 25 मार्च 2010

कविता :छोटे-पौधे कितने अच्छे

छोटे-पौधे कितने अच्छे

छोटे-पौधे कितने अच्छे ।
फूल लगे हैं कितने अच्छे ॥
गेंदा गुलाब फूल हैं अनेक ।
बगीचे में लगते हैं सब एक ॥
पौधे-हमें लगते अच्छे ।
कितने प्यार कितने अच्छे ॥
कलियाँ खिलतीं खिलता फूल ।
कितने अच्छे लगते फूल ॥
छोटे- पौधे कितने अच्छे ।
पौधे हमें लगते अच्छे ॥
कलियाँ खिलती खिलता फूल ।
कितने अच्छे लगते फूल ॥

लेखक :धर्मेद्र कुमार
कक्षा :७
अपना घर

शुक्रवार, 19 मार्च 2010

कविता :आतंकवाद

आतंकवाद

कैसे हैं भइया यह आतंकवाद ।
करते रहते देश को बरबाद ॥
कहाँ से आते हैं आतंकवादी ।
करते रहते देश की बर्बादी ॥
जाने कितनी जाने जाती ।
फिर भी इनको दया न आती ॥
मुम्बई में बम ब्लास्ट किए ।
पता नहीं कितनी जानें लिए ॥
बम ब्लास्ट ये खूब हैं करते ।
मरने से यह नहीं है डरते ॥

लेखक :धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा :७
अपना घर

शनिवार, 6 मार्च 2010

कविता -दंगा

दंगा
एक बार शेर और बकरी में हो गया दंगा ।
बकरी बोली हिम्मत है तो ले मुझसे पंगा ॥
शेर ने बकरी की बात को सुनकर ।
बोला येसे शब्दों को चुनकर ॥
शेर और बकरी की बातों को सुनकर ।
तभी अचानक आया नन्हा खरगोश ॥
और बोलने लगा शेर की तरफ ।
बकरी बोली चुपकर कछुए से हार गया ॥
बातों ही बातों में शेर बकरी से हरा ।
तब शेर ने गुस्से में बकरी को मारा ॥
बहाना बना कर बकरी गई भाग ।
तभी नन्हा खरगोश गया जाग ॥
डर के मारे खरगोश वहाँ से भागा ।
शेर बेचारा है कितना अभागा ॥

लेखक :धर्मेन्द्र
कक्षा : ७
अपना घर