बुधवार, 13 जुलाई 2011

कविता : हमारे नेता

 हमारे नेता

ये देश फिर बढ़ रहा है गुलामीं की ओर ,
क्योंकि भ्रष्टाचार फैला है चारो ओर....
अब सब जनता इन लोगों से बेहाल ,
क्योंकि नेता अब बन गयें हैं चोर .....
अपनी बात को कहने से डरता है इंसान,
क्योंकि ये नेता हो गये हैं घूसखोर ....
बनकर नेता पैसे ये खूब कमाते ,
क्योंकि नेता से ये बन गये चोर ......

लेखक : धर्मेन्द्र कुमार
कक्षा : 9
अपना घर

2 टिप्‍पणियां:

vidhya ने कहा…

आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

vidhya ने कहा…

आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/