शनिवार, 30 जुलाई 2011

कविता - भ्रष्ट नेता

भ्रष्ट नेता 
भ्रष्ट हैं पुलिस भ्रष्ट हैं नेता ,
बैठे- बैठे कुछ नहीं करते .....
जब चोरी चमारी होती हैं  ,
 तो  खड़े- खड़े बस ताका करते....
 जब आती हैं चुनाव की बारी ,
 तो सबके घर जाया करते ......
 भ्रष्ट हैं पुलिस भ्रष्ट हैं नेता......
 लेखक - सागर कुमार
 कक्षा -८  अपना घर ,कानपुर

1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

बहुत खूब! सुन्दर रचना....बधाई!!!