शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

कविता -बादल

कविता -बादल
काले - काले बादल आये ,
रिमझिम - रिमझिम जल बरसाए.....
हरे -भरे पेड़ पौधे उग आये ,
हरी - भरी चारो ओर घास उग आयी.....
हरी- हरी घास सब के मन को भाये,
हर जगह कोमलता फैलाये ....
जो सब को मन को भाये ,
काले- काले बादल आये.....

लेख़क - हंसराज
कक्षा - ८ अपना घर ,कानपुर




1 टिप्पणी:

vidhya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर

मेरे ब्लॉग पे आप का स्वागत
http://sarapyar.blogspot.com