मंगलवार, 26 जुलाई 2011

कविता : हो मानव का कल्याण

 हो मानव का कल्याण

 मच गया सभी जगह हा-हा कार ,
कौन है तेरे बिन बेकार .....
समझ है पर ज्ञान नहीं ,
लेकर तू गुरुजनों का ज्ञान ....
कर तू विश्व में अपना नाम ,
जिससे देश न हो बदनाम .....
कर तू हर दम येसे ही कार्य ,
जिससे मानव का हो कल्याण.....

लेखक : अशोक कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

3 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत उमदा। बधाई।

"रुनझुन" ने कहा…

सुन्दर कविता... बहुत-बहुत बधाई...

Sunil Kumar ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ....