शनिवार, 2 जुलाई 2011

कविता - पड़ गया आकाल

 पड़ गया आकाल 
 सूरज हैं लाल,
 उसमें  मारा बाण....
 सूरज में पड़ गया आकाल,
 इसलिए नन्दू का हुआ बुरा हाल.....
 तब  मेरे फोन में  आयी एक काल ,
मैंने पूछा कौन ....
 उसने कहा मै पाल,
 नन्दू की उधर उतर गयी खाल.....
 नन्दू के घर में पड़ गया आकाल ,
सूरज हैं लाल ......
उसमे मारा बाण .....
 लेखक -मुकेश  कुमार
कक्षा- १० अपना घर ,कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर कविता

gunjan ने कहा…

are dusra bad aasman me maro barish hone lagega,