गुरुवार, 30 जून 2011

कविता -ख़त्म हुई छुट्टिया

ख़त्म हुई छुट्टिया
 गर्मी की छुट्टियाँ हुई ख़त्म,
 अब तो रोज जाना हैं स्कूल ....
 छुट्टियों में की हैं जो मस्ती ,
 अब बच्चो उसको जाओ भूल.....
 अब तो रोज जाना हैं स्कूल ,
 पढना- लिखना और मार खाना .....
 नई कक्षा में हैं हम सब को जाना ,
 नई -नई कांपियां और किताबे पाना.....
 रात-दिन हैं अब तो जागना ,
 देर से उठे तो जल्दी स्कूल को भागना ......
अब तो करना होगा खूब पढाई ,
 मस्ती तो ख़त्म हुई अब मेरे भाई....
 लेखक - धर्मेन्द्र कुमार 
 कक्षा - ९ अपना घर ,कानपुर

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

चलो, बढ़िया है..पढ़ना भी तो जरुरी है न!!!

चैतन्य शर्मा ने कहा…

हूँ अच्छी कविता ......मेरी छुट्टियाँ तो अभी शुरू ही हुईं हैं :)