शुक्रवार, 10 जून 2011

कविता -आम रसीले

आम रसीले
आम क्या हैं ये रसीले ,
पेड़ो पर लगे हैं पीले - पीले ....
सोच रहे हैं कब जोर से हवा चले,
पीले- पीले आम खाने को मिले ....
आम का हैं अब समय आया ,
खट्टे-मीठे आम खाने का जी ललचाया ....
पेड़ो पर लगे हैं कच्चे -पक्के आम ,
बाजारों में हैं इनके कितने मंहगे दाम.....
आम क्या हैं ये रसीले ,
पेड़ो पर लगे हैं पीले - पीले .....
लेखक - धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर ,कानपुर 

2 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

सुन्दर कविता मुँह मे पानी आ गया।

sandhya ने कहा…

meethe meethe taaje aam
khub rasile meethe aam
naani ke ghar jana hai
meethe aam khana hai
baag bagiche ghum ghum ke
khub todne meethe aam