बुधवार, 22 जून 2011

कविता :बढ गयी महंगाई

 बढ गयी महंगाई 
छोटी मोटी तितली ,
सीढ़ियों से फिसली ....
नालियों में गिरने से , 
बच गयी मरने से ....
पर चोट लग गयी गिरने से ,
वह अस्तपताल पहुंची जल्दी से ....
वहां पे भीड़ लगी थी इतनी ,
थोड़ी देर में भीड़ लग गयी दुगनी ....
तितली का जब आया नंबर ,
वह पहुँची डाँक्टर के रूप के नीचे .....
डाँक्टर ने दी जब से उसको दवाई ,
तब से बढ गयी है महंगाई  ....

लेखक : आशीष कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर   





























1 टिप्पणी:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर कविता