सोमवार, 15 मार्च 2010

कविता कभी न पहुचना एवरेस्ट शिखर के पास

कभी न पहुचना एवरेस्ट शिखर के पास
यह संसार हमारा ,
यह भूमि हमारी....
सबको हैं जीने क अधिकार,
एवं सब बने एक दिन महान....
कभी न बनाना इतने महान,
की पहुच जाओ एवरेस्ट शिखर के पास.....
मत भूलना कभी अपनी औकात,
रहना इसी भूमि....
एवं विश्व ग्राम के साथ,
चाहे क्यों न बन जाऊं महाराज....
सभी से मिलाना उसी तरह से,
जैसे चलते थे तुम....
अपने मित्रो के संग,
लेकिन कभी न बनना इतने महान....
की पहुँच जाओं एवरेस्ट शिखर के पास.....
लेखक अशोक कुमार कक्षा ७ अपनाघर कानपुर