रविवार, 14 मार्च 2010

कविता : जिन्दगी दो पल की

जिन्दगी दो पल की

इंसान की जिन्दगी की सिर्फ ,
दो पल की होती है .....
उसी में जीना और उसी में मरना ,
यही है जिन्दगी का मतलब .....
इंसान जीता है कुछ पाने के लिए ,
लेकिन सब कुछ पाते- पाते .....
सब कुछ खो देता है ,
आखरी में ठोकर खा कर ही .....
उसकी जान चली जाती है ,
इंसान की जिन्दगी दो पल की होती है .....

लेखक :हंसराज कुमार
कक्षा :
अपना घर

1 टिप्पणी:

RaniVishal ने कहा…

Sundar va sarthak baat...dhanywaad.