मंगलवार, 24 मार्च 2020

कविता : रंगों की होली

" रंगों की होली "

होली है रंगों का त्यौहार,
बच कर रहना मेरे यार |
अबीर -गुलाल लगा रहे हैं,
अच्छा - अच्छा खिला रहे हैं |
सबको रंग लगा रहे हैं
उड़ रहा है रंगों का फौवार,
ख़ुशी से मना रहे हैं त्योहार |
गीले पड़ें हैं सारे रास्ते,
कैसे चलूँ किसी के वास्ते |
पापड़ों में भी है अलग स्वाद,
 यही है रंगों का त्यौहार मेरे यार |
होली है रंगों का त्यौहार,
बच कर रहना मेरे यार |

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी गई है जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं | कुलदीप पढ़ -लिखकर एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं |   पढ़ने में बहुत ही होशियार है और अपने समाज और परिवार वालों  चाहते हैं |

सोमवार, 23 मार्च 2020

कविता : नई जिंदगी

" नई जिंदगी "

मनुष्य की नई जिंदगी,
और स्वभाव सुन्दर बनाता है | 
डर और अभ्यास 
अपने से दूर करता है | 
रास्ते और सफर 
दोनों ही तय करते हैं की 
मनुष्य की परिश्रमता ही 
उनको जीवित रखती है | 
मेहनत और जूनून 
मनुष्य को नै राह दिखाती है
परिश्रम और मेहनत 
मनुष्य को नई जिंदगी देती है | 

कवि : सनी कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता सनी के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | सनी कवितायेँ बहुत अच्छी लिखते है | इस कविता का शीर्षक नई जिंदगी दिया है जिसमें मनुष्य का जिक्र किया गया है | उम्मीद है की सनी और भी अच्छी कवितायेँ लिखेंगें |
 

रविवार, 22 मार्च 2020

कविता : बच्चों की टोली होली में

" बच्चों की टोली होली में "

होली आई होली आई,
रंग बिरंगी होली आई | 
 होली में उड़ते हैं रंग,
सब हो जाते है रंग बिरंग | 
सब लोग साथ में खेलते होली,
एक दूसरे के मारते रंगों की गोली | 
मिटटी से खेलते हैं होली,
बच्चे की चलती है टोली | 
होली आई होली आई,
रंग बिरंगी होली आई | 

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर

कवि परिचय :  नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार  वाले हैं | नवलेश को कवतायें लिखना बहुत अच्छा लगता है | नवलेश बहुत अच्छा क्रिकेट खेलते हैं और बहुत छक्के मारते हैं | पढ़ने में बहुत अच्छे हैं

शनिवार, 21 मार्च 2020

कविता : चिड़िया

" चिड़िया "

चिड़िया चह -चह चहाती है,
फुदक -फुदक सबका मन भरती है | 
कभी एक डाली पर आती है,
कभी दूसरी डाली पर उड़ जाती | 
फिर उड़ती है चुगती दाना,
बच्चो को है उन्हें खिलाना | 
एक -एक कर गाती गाना,
आ जाती है घर के अंदर,
बच्चों को देती ज्ञान का समंदर |
फिर उड़कर बाहर जाती है,
डाली -डाली पर मंडराती है | 
चिड़िया चह चह चहाती है | | 

कवि : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर
कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | नवलेश को कवितायेँ बहुत अच्छी लगती है और कवितायेँ लिखते भी हैं | हमें उम्मीद है की नवलेश भविष्य में बहुत सी कवितायेँ लिखेंगें | इस कविता में एक चिड़िया के बारे में प्रस्तुत किया है |

शुक्रवार, 20 मार्च 2020

कविता : कल की दुनिया हमारी है

" कल की दुनिया हमारी है "

शहमें हम रह चुके,
गम हम सह चुके |
तेरे बातों में भी गौर किया मैंने
तेरे कहने पर जिंदगी जिया हमने
पर कुछ मिलने की आशा न दिखी मुझको
क्योंकि मैं समझ चूका था
परवाह नहीं है तुझको खुद तो चुका है
 और मेरे सपने छीन रहा है
पर अब आगे नहीं
क्योकि तुमसे कुछ तो हुआ न सही
अब हमारी बारी है
क्योंकि कल की दुनिया हमारी है
तुझे परवाह क्या है
क्योकि तुम तो मील से पैसा ऊगा लोगे
उन पैसों से सुविधा जुटा लोगे
हमारे लिए काले  कण छिड़क जाओगे
 हमारी जिंदगी बर्बाद करोगे
इसीलिए अब हमारी बारी है
क्योंकि कल की दुनिया हमारी है  

कवि :  देवराज कुमार , कक्षा : 9th ,  अपना घर

गुरुवार, 19 मार्च 2020

कविता : कोरोना

" कोरोना "

फ़ैल रही है महामारी,
कर लो अब बचने की तैयारी | 
लोग हो या हो व्यापारी 
सबको फैलेगी कोरोना वायरस  बीमारी | 
सर दर्द , खाँसी और बुखार,
इस वायरस का नहीं है उपचार | 
जिसको वायरस लपकता है,
वो जिंदगी से जल्द टपकता है | 
आजकल इसी का है भौकाल,
लोगों ने कर ली धीरे अपनी चाल | 

कवि : विक्रम कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता विक्रम के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं और कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि रखते हैं | विक्रम एक अच्छे छात्र होने के साथ साथ एक अच्छे मित्र भी बन कर रहते हैं | विक्रम को कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है |



सोमवार, 16 मार्च 2020

कविता : क्रिकेट

" क्रिकेट "

क्रिकेट में हो रहे हक्के -बक्के,
हर गेंदबाज कहते हैं छक्के | 
चाहे हो जसप्रीत या हो हमनप्रीत,
हर बल्लेबाज मरते हैं छक्के | 
फिर भी रहते हैं हक्के बक्के,
अच्छे अच्छे गेंदबाज हो जातें हैं खामोश | 
फिर भी टीम वाले बढ़ाते है जोश,
कभी बल्लेबाज तो कभी गेंदबाज | 
उड़ा देते हैं दर्शक के होश | | 

कवि : अजय कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता अजय के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | अजय को कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है | पढ़ाई करने के साथ साथ खेलने में भी रूचि रखते हैं | अजय को नया काम करने में मज़ा आता है |

रविवार, 15 मार्च 2020

कविता : उस दिन की बात

" उस दिन की बात "

सोते सोते याद आए उस दिन की बात,
जिस दिन खेल रहे थे सबके साथ | 
भारत में हो रही थी पढ़ाई की बात,
जिस दिन सभी लोग थे एक साथ |
फिर हमें याद आई,
जिस दिन पढ़ रहे थे सबके साथ,
नदियों में नहाते थे पानी के साथ | 
सपने में हमें याद आया किसी ने लगाया  हाथ,
जब हम पढ़ रहे थे अंग्रेजी की किताब  |
सोते सोते याद आए उस दिन की बात,
जिस दिन खेल रहे थे सबके साथ | 

नाम : नवलेश कुमार , कक्षा : 5th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता नवलेश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं | नवलेश को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं और कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि रखते हैं | हमें उम्मीद है की नवलेश और भी अच्छी कवितायेँ लिखेंगें |


गुरुवार, 20 फ़रवरी 2020

Poem : The Dark Way

" The Dark Way "

In the dark way of life
indicating numerous plight 
No one know the perfection of die 
but still you have to live great life 

negativity will jumble your mind 
makes you in all blind 
destination will go behind 
but still you have to climb 

darkness will not be all 
we hope dazzling light be fall 
our strength will be high 
when we touch the sky  

Poet intrroduction : This poem is being written by Pranjul kumar of class 10th who is living in Apna Ghar organization present time . This poem if for those who give up their potential in midway of life . Just keep on trying untill and unless you reached your goal and your destination .

सोमवार, 3 फ़रवरी 2020

कविता : आज़ाद परिन्दें हैं हम

" आज़ाद परिन्दें हैं हम "

आज़ाद परिन्दें हैं हम 
बूँद -बूँद से बढ़ते हैं हम 
हर पर खयाल है आता 
घर परिवार की याद सताता 
 छोड़ा है हमने जो ये सब 
खिलाना होगा कीचड़ में कमल 
हर करतब हमें है सीखना 
आगे चलकर इसे है बरतना 
आज़ाद परिन्दें हैं हम 
बूँद -बूँद से बढ़ते हैं हम 
उम्मीद की किरण हैं हम 
 हमसे खिले हैं फूल के रंग 
आगे बढ़ते रहेगे हम 
कभी न तोड़ेगें हम दम 
आज़ाद परिन्दें हैं हम 

कवि : कुलदीप कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर 
कवि परिचय : यह कविता कुलदीप के द्वारा लिखी है जो की छत्तीसगढ़ के रहने  कुलदीप को कवितायें लिखने का बहुत शौक है | कुलदीप को गणित में बहुत रूचि है और इतिहास को समझना बहुत अच्छा लगता है | एक अच्छे इंसान के साथ एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं | 

कविता : पढ़ाई

" पढ़ाई "

सुबह तो कब हो जाती है,
दिन कब गुजर जाता है | 
ये तो पता ही नहीं चलता | | 
काश मैं पूरे साल पढ़ाई की होती,
तो ये नौबत न आती | 
इसको मैं गलती कहूं, 
या फिर यूँ लापरवाही कहूँ | 
पर अब मुझे सूझ नहीं रहा, 
क्या करूँ और क्या न करूँ | 
सुबह बैठता हूँ पढ़ने, 
तो शाम जाती है 
रात को बैठो तो सुबह हो जाती है | 
अब तो कुछ ही दिन बाकी है 
मेरे परीक्षा को आने में | 
अब पता नहीं क्या होगा, 
ये तो भगवन ही जानेगा  | 

कवि :नीतीश कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर 

कवि परिचय : यह कविता नितीश के द्वारा लिखी गई है जो की बिहार के रहने वाले हैं | नितीश को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और अभी तक बहुत सी कवितायेँ लिख चुके हैं | नितीश को नया सिखने में बहुत दिलचस्पी है | नितीश को कंप्यूटर में बहुत रूचि है