शनिवार, 9 मई 2009

कविता: सब्जी का बाजार

सब्जी का बाजार
आलू भइया चले घूमने ।
कद्दू के संग लगे झूमने॥
तब तक दौड़ा शिमला आया।
अपने संग गाजर को लाया॥
मिर्च टमाटर दूर खड़े थे।
मटर और गोभी डंटे पड़े थे॥
बैगन थोड़ा मस्ती में था।
कटहल राजा गस्ती में था॥
लगी झूमने धनिया रानी।
संग में नाचे ककड़ी नानी॥
तभी रंग में भंग पड़ गया।
कद्दू शिमला पर चढ़ गया॥
शिमला को फ़िर गुस्सा आया।
बगल से उसने डंडा लाया॥
शिमला ने कद्दू को मारा।
कद्दू लुढक गया बेचारा॥
इतने में लौकी आ गई ।
चारो तरफ से भीड़ छा गई।।
लौकी पूछी क्या हुआ है भाई ।
क्यो कर रहे हो दोनों लड़ाई॥
बंद करो आपस का झगड़ा।
किसी करो न कोई रगड़ा॥
आपस में मिलजुलकर रहना।
सब सब्जी का यही है कहना ॥
आपस में जब मिल जाते है ।
अच्छी सब्जी बन जाते है॥
कविता: मुकेश कुमार, कक्षा ७, अपना घर
पेंटिंग: ज्ञान कुमार, कक्षा ५, अपना घर






कविता: रात के अंधेरे में


रात के अंधेरे में
रात के अंधेरे में भूतों के डर से।
निकल पड़ा दुसरे पड़ोसी के घर से॥
रास्ते में निकल पड़ा सांप लंबा सा।
दूर से दिखा तो लगा बिल्कुल लकड़ी सा॥
पास जाकर देखा तो मै डर गया।
डर के मारे मै पड़ोसी के घर भाग गया॥
बीती रात हुआ जब उजाला।
तब मै पड़ोसी के घर से निकला॥
गा रही थी चिड़िया पेडों पर।
मै पहुँच गया अपने घर पर॥


कविता
: आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग: ज्ञान कुमार कक्षा ५, अपना घर

शुक्रवार, 8 मई 2009

कहानी:- नन्हा शिकारी

नन्हा शिकारी
बहुत साल पहले की बात है। एक राजा का ४ - ५ गाँवो का एक छोटा सा राज्य था, उस राज्य में में सभी लोग खुशी से रहते थे। उसके राज्य का एक गाँव जंगल के किनारे पर था। एक बार उस गाँव के किनारे वाले जंगल में कंही से शेर आ गया। उधर से जो भी गुजरता था, शेर उसे मार कर खा जाता था। शेर से परेशान होकर गाँव वालो ने राजा के यंहा फरियाद की, राजा ने ये घोषित करवाया कि जो भी आदमी इस शेर को मार देगा, हम उसे बहुँत सारा धन और १० बीघा खेत भी देंगे। सभी ने ये ये बात सुनी, मगर किसी कि यह हिम्मत नही हुई कि वह जाकर शेर को मारे। उसी गाँव में एक १० वर्ष का लड़का अपने माँ के साथ रहता था। उसकी माँ बहुँत ही गरीब और बीमार थी। उस लड़के ने शेर को मारने के लिए ठान लिया। वो राजा के पास गया और कहा आप बस मुझे एक धनुष और जहर में बुझे कुछ तीर दे दीजिये। मै शेर को मरूँगा, राजा उस छोटे से बच्चे को देखकर मुस्कराए मगर उसकी बहादुरी और जिद को देखकर उसे धनुष और तीर दे दिए। उस लड़के ने धनुष और तीर लेकर जंगल कि तरफ़ चल दिया। वह एक अपने साथ एक आदमी का पुतला भी बना कर ले गया। वह जंगल में जाकर एक पेड़ पर चढ़ गया और उसकी डाल से उस आदमी के पुतले को लटका कर थोडी उचाई पर बाँध दिया, और खुद पत्तो के बीच छुपकर धनुष और तीर लेकर बैठ गया और शेर के आने का इंतजार करने लगा। उधर शेर को कई दिनों से शिकार नही मिला था, घूमते - घूमते वो उस पेड़ के पास पहुँच गया। जैसे ही वो पुतले को देखा उसने सोचा कि वो कोई आदमी है , वो उस पुँतले पर छलांग लगा दी, तभी पत्तो के बीच छुपे लड़के ने उसके दोनों आँखों के बीच निशाना साध कर तीर चला दी, तीर सीधे आँखों के बीच में जाकर लगा गया। शेर एक जोर का दहाड़ लेकर जमीं पर गिर पड़ा, और मर गया। राजा ने जब यह सुना तो उन्होंने उस लड़के को सम्मानित किया और ढेर सारा धन के साथ-साथ १० बीघा जमीं दिया, और उसे अपने राज्य का नन्हा शिकारी बना दिया। अब वो नन्हा लड़का अपनी माँ और सभी गाँव वालो के साथ खुशी पूर्वक रहने लगा।
कहानी:- आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग:- मोनू कुमार, कक्षा ५, अपना स्कूल

कविता:- राजा रानी

राजा रानी
एक था राजा एक थी रानी
दोनों की है अजब कहानी
राजा करता था शिकार।
रानी बनती थी आचार॥
दोनों खाते थे आचार।
अच्छा रहता उनका विचार॥
कभी न पड़ते वे बीमार।
रहते हरदम होशियार॥
एक दिन दोनों में हो गई लड़ाई।
एक दुसरे की करी पिटाई॥
रानी जीती राजा हारा।
राजा के पास बचा न चारा॥
राजा बोला अब न करेंगे लड़ाई।
आओ एक दूजे की करे बड़ाई ॥

ज्ञान कुमार, कक्षा ५, अपना घर





कहानी:- घमंडी शेर

घमंडी शेर
एक गांव के पास में एक खूब घना जंगल था, उस जंगल में ढेर सारे जानवर रहते थे।जंगल के सब जानवरों ने मिलकर अपने यहाँ एक शेर को राजा बनाया। मगर धीरे - धीरे शेर अपने को जंगल का मालिक समझने लगा। वह बहुत घमंडी हो गया था, वह अपने को सबसे महान और ताकतवर समझने लगा। वह सोचता था कि उससे कोई नही जीत पायेगा। घमंडी शेर जंगल में सब जानवरों के ऊपर अत्याचार करने लगा।जंगल के पास के गाँव के लोग उस जंगल में लकड़ी और फल चुनने आते थे। जंगल के जानवर कभी भी उनको परेशान नही करते, गाँव के लोग भी जंगल के जानवरों का ख्याल रखते थे। उस जंगल में कोई भी शिकारी गाँव के डर वालो से शिकार करने नही आता था। गाँव वालो का जंगल में आना उस घमंडी शेर को पसंद नही आया। शेर अब गाँव वालो को परेशान करने लगा, गाँव के लोग अब इस जंगल के तरफ आने से डरने लगे। शेर ये सोच के खुश हो रहा था की सब गाँव वाले मुझसे डरते है अब मै दुनिया में सबसे ताकतवर हूँ। एक दिन शेर जंगल में घूमते - घूमते गांव की सीमा पर पहुचं गया, वंहा खेत में एक किसान अपने खेत में काम कर रहा था। शेर ने उस किसान को डराने के लिए उसे दौड़ा लिया, किसान शेर को अपनी तरफ़ आता देख डर के मारे अपने घर की तरफ़ भागा। शेर भी उस आदमी के दौड़ता हुआ गाँव में पहुँच गया। शेर के गाँव में पहुँचते ही गाँव के सब कुत्तो ने मिलकर शेर को चारो तरफ़ से घेर लिया और उसे काटने लगे शेर घबरा गया मगर वो अब चारो तरफ़ से कुत्तो के बीच घिर गया था। सभी कुत्तो ने मिलकर उस घमंडी शेर को मार डाला। शेर के मरते ही सभी गांव वाले खुश हो गए। उधर जंगल में जैसे ही ख़बर मिली की घमंडी शेर को गाँव के कुत्तो ने मार डाला जंगल के सारे जानवरों ने खूब खुशी मनाई और सभी जानवरों ने मिलकर इस बार सबसे अच्छे हाथी दादा को जंगल का राजा नियुक्त किया। अब जंगल में फ़िर से गाँव वाले जाने लगे और पूरे जगल में सभी जानवर मजे से रहने लगे।
कहानी:- सोनू कुमार, कक्षा ७, अपना घर
पेंटिंग:- आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर

बुधवार, 6 मई 2009

कहानी:- हाथी और बकरी

हाथी और बकरी
एक जंगल में हाथी और बकरी दोनों साथ रहते थे। दोनों में बहुँत दोस्ती थी हाथी और बकरी दोनों खाना ढूंढने साथ में ही निकलते थे। एक दिन दोनो जगंल में दूर निकल गए, उन्हें वहां पर एक तालाब दिखाई दिया, उस तालाब के किनारे एक बेर का पेड़ दिखा, बेर का पेड़ देख कर हाथी और बकरी दोनों खुश हो गए। बेर खाने के लिए हाथी ने बेर के पेड़ को जोर से हिलाया ढेर सरे पके बेर जमीं पर गिरने लगे। उसी पेड़ पर एक चिड़िया का घोसला भी था, उस घोसले में चिड़िया का बच्चा सो रहा था, चिड़िया कहीं दाना चुगने गई थी। बकरी जल्दी- जल्दी बेर बटोरने लगी, बे के पेड़ हिलने से घोसले में सोया चिड़िया का बच्चा तालाब में गिर गया। चिड़िया का बच्चा डूबने लगा ये देख कर बकरी जल्दी से पानी में कूद गई, लेकिन बकरी को ज्यादा तैरने नही आता था। बकरी भी डूबने लगी तभी हाथी तालाब में कूद गया और उसने बकरी और चिड़िया के बच्चे को तालाब से बाहर निकालकर उन्हें डूबने से बचा लिया। चिड़िया तब तक वापस आ गई अपने बच्चे को ठीक देखकर चिड़िया बहुत खुश हुई। उसने हाथी और बकरी को यंही पर साथ में रहने को कहा। हाथी और बकरी चिड़िया के साथ वही पर रहने लगे। कुछ दिनों में चिड़िया का बच्चा बड़ा हो गया। चिड़िया पेड पर और हाथी बकरी पेड के नीचे रहते थे चिड़िया उड़कर पता लगाती कि कहां कहां फल लगे हैं फिर चारो वहां जाते और खूब फल खाकर नाचते कूदते मजे करते।
कहानी :- आदित्य कुमार, कक्षा ६, अपना घर
पेंटिंग १:- चंदन कुमार, कक्षा ३, अपना घर
पेंटिंग २:- लवकुश कुमार, कक्षा ५, अपना घर

कहानी:- सांप और चूहे की दोस्ती

सांप और चूहे की दोस्ती
एक बार की बात है, एक बिल में एक चूहा रहता था। एक दिन उसी बिल के पास एक सांप आकर बैठ गया। चूहा ने सोचा अब तो हमारी खैर नही, ये सांप हमे खा जायेगा पर वह सांप ऐसा नहीं सोचता था। वह सांप चूहे से दोस्ती करने आया था, क्यो की उस सांप के पास अपना घर नहीं था। वह सांप एक घर तलाश कर रहा था जहाँ पर वो रह सके, पर चूहा के मन में ये डर बैठा रहा की ये सांप कहीं हमको खा गया तो... सांप ने चूहा को बताया की वो उसे खाने नही आया है वो तो बस एक घर को तलाश रहा है जहाँ पर वो रह सके.... यह सुनकर चूहा अपने बिल से बहार आकर बोला भाई आप कौन हो और मेंरे घर में क्या करने आये हो सांप बोला भाई मेरा कोई नहीं है और मेरा पास घर भी नहीं है। अगर आप मुझे अपने घर में रख लेंगे तो आप की बडी दया होगी चूहा ने बोला ठीक है भाई रख लेगें। चूहे ने अपने घर के एक हिस्से में सांप को रहने के लिए जगह दे दी। चूहा और सांप दोनों साथ - साथ रहने लगे। एक दिन सांप बीमार पड़ गया वो शिकार करने नही जा सका उसे खाने में कुछ नही मिला......भूख के मारे सांप के पेट में दर्द होने लगा। सांप ने सोचा की इस चूहे को ही मार के खा जाते है फ़िर उसने सोचा की इस चूहे ने अपनी जान जाने की परवाह किए बिना हमें रहने की जगह दी है, इसको खाना ठीक नही होगा। सांप को इस तरह पड़ा देखकर चूहा ने सोचा ये सांप कहीं शिकार के लिए गया भी नही और लग रहा है कुछ खाया भी नही है। चूहा चुपके से सांप को देखने लगा सांप भूख के मारे तड़प रहा था.... चूहा को यह देखा नही गया उसने पूछा कि तुम खाना क्यो नहीं खाते हो सांप ने कहा मै बीमार हूँ इस लिए शिकार नही कर सका मेरे पास कोई खाना नही है... भूख के मारे मेरा बुरा हाल है कई बार मेरे मन में बुरा ख्याल आया की मै तुमको खा जाऊ मगर नही दिल ने मना कर दिया। चूहे ने यह सुनकर दौड़कर बहार गया और उसके लिए खाने का इंतजाम किया... फ़िर सांप और चूहे दोनों ने साथ में बैठकर भरपेट खाना खाया..... अब सांप और चूहे दोनों रोज साथ में खाना खाते और घूमने जाते। सांप और चूहा दोनों मजे से एक ही बिल में रहने लगे... धीरे - धीरे सांप और चूहे की दोस्ती की कहानी पूरे जंगल में फ़ैल गई।
कहानी:- सागर कुमार, कक्षा ५, अपना घर
पेंटिंग:- लवकुश कुमार, कक्षा ५, अपना घर

मंगलवार, 5 मई 2009

कहानी:- मूर्ख सियार

मूर्ख सियार
एक जंगल में दो सियार रहते थे, वे दोनो भाई थे। वे दोनो हमेशा आपस मे लड़ते रहते थे। उनके माता पिता उनसे बहुत परेशान थे। उनके माता पिता ने जंगल के राजा शेर को अपनी परेशानी बताया। शेर ने दोनों सियारों को बुलाकर उन्हे बहुत समझाया लेकिन वे नही माने, एक दिन सियार की मम्मी मर गयीं। उनके पापा ने अपने दोनों बेटों को बुलाया और उनको समझाया कि देखो हम भी एक दिन मर जायेंगे तो उसके बाद खेत को कौन देखेगा, अगर तुम दोनो ऐसे ही लड़ते रहे तो हमारे खेत कोई दूसरा ले लेगा इसलिए आपस में लड़ने की बजाय तुम लोग मिलकर रहो, लेकिन फ़िर भी उनकी समझ में नही आया। अंततः एक दिन उनके पिता भी चल बसे। सियार के पास तीन जमीनके टुकडे थे । दोनों सियारों ने जमीन का बटवारा करना तय किया, बड़ा वाला सियार अपने छोटे सियार भाई से बोला कि दो खेत हम ले लेते है और एक खेत तुम ले लो। छोटा भाई सियार बोला नहीं हम दो खेत लेंगे, इस बात को लेकर दोनों सियारों में खूब झगड़ा होने लगा। उसी समय उधर से एक लोमड़ी निकल रही थी छोटे भाई सियार ने लोमड़ी को जाते देखकर उसे आपस में समझौते के लिये बुलाया। लोमड़ी ने उन दोनों सियारों को पास में बैठाया और कहा की तुम दोनों चाहते हो की तुमसे ज्यादा दुसरे को न मिले, दोनों सियारों ने कहा हाँ। लोमड़ी ने कहा की मेरे पास एक तरीका है तुम दोनों अपने तीनो जमीन के टुकड़े मुझे दे दो इन जमीन के टुकडों से जब एक और जमीन का टुकडा पैदा होगा तब तुम्हारे पास चार जमीन के टुकडे हो जायेंगे फ़िर दोनों दो - दो जमीन के टुकड़े ले लेना। दोनों मुर्ख सियार लोमड़ी के इस बात को मान गए और वे खुश हो गए की उन्हें जमीन के दो - दो टुकड़े मिलेंगे। दोनों ने अपने जमीन के तीनो टुकड़े के लोमड़ी को दे दिया। लोमड़ी ने उनसे तीन साल बाद आने को कहा। लोमड़ी आराम से उनमे खेती करके आनाज उगने लगी। तीन साल बाद दोनों सियार आए आयर कहा लोमड़ी बहन जमीन का बच्चा हुआ क्या? लोमड़ी उन्हें देखकर जोर - जोर से रोने लगी दोनों सियार डर गए, लोमड़ी बोली सियार भइया हमने बहुँत मेहनत की मगर आपकी जमीन बच्चा देते हुए मर गई। मैंने आपका बहुँत इंतजार किया आप नही आए तो मैंने उसे जंगल फेंक दिया। इस तीन साल में लोमड़ी ने जमीन पर ढेर सारा पेड़ लगा दिया अब वंहा पर कोई खाली जमीन नही थी। लोमड़ी ने कहा देखो यंहा पर कोई जमीन नही है, दोनों मूर्ख सियार रोते हुए वापस जंगल की तरफ चले गए।
कहानी:- धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा 6, अपना घर
पेंटिंग:- आदित्य कुमार, कक्षा 6, अपन घर

कविता:- छोटी सी मख्खी

छोटी सी मख्खी
एक छोटी सी मख्खी
दिन भर रहती घर के अन्दर
घर के अन्दर जब भी आ जाती
घर के दरबाजे खुले पा जाती
एक छोटी सी मख्खी..
दिन भर रहती घर के अन्दर
घर के अन्दर तब - तब आती
घर के अन्दर जब गन्दगी रहती
खाने में मुंह लगा देती हैं
सबको को बिमार बना देती हैं
अपने आप को बचा कर भाग जाती
फ़िर न किसी से पकड़ में आती
वापस उस घर में शक्ल दिखाती नहीं
क्योंकि वह पहचान में आती नहीं
सब एक जैसी लगती हैं ।
एक छोटी सी मख्खी
दिन भर रहती घर के अन्दर ....
कविता:- अशोक कुमार , कक्षा ६ , अपना घर
पेंटिंग:- चंदन कुमार, कक्षा ३ अपना घर

सोमवार, 4 मई 2009

सम्पादकीय

सम्पादकीय
प्यारे दोस्तों नमस्कार ,
मै आपका नया सम्पादक मुकेश कुमार हूँ। मेरे प्रिय दोस्तों मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी लोग तन-मन से अपना लेखन का काम करेंगे और अच्छा लिखेंगे। मेरे प्रिय साथी पहले के लेखन मे और अभी की लेखन में बहुत परिवर्तन होता आ रहा है, और मुझे आपसे गुजारिश है कि आप सभी अच्छी कवितायें, कहानियाँ, चुटकुला, पेन्टिग, सैरसपाटा और सारांश कुछ इस तरह लिखने की कोशिश करे कि आपकी सब लोग तारीफ करें और अगर यह बाल सजग अच्छी तरह चलता रहा तो हम सब बच्चों के लिए गर्व की बात है। आप सभी सभी लोगों ने समाज के बारे में अच्छा लेखन लिखकर अपनी सोच को आगे बढ़ाया है। हम सभी लोग कविता, कहानी इसलिए लिखते है, क्योकि इससे हम लोगो की जो सोच है वह और आगे बढ़ती है। आप अच्छी- अच्छी कवितायें और कहानियाँ लिखकर अपनी सोच को और विकसित करे ये हमारा सर्वश्रेष्ट उद्देश्य है। आप में से जिनको कविता या कहानी लिखनी न आती हो तो वह लिखने का अवश्य प्रयत्न करें, क्योंकि आप जब दस लाइन लिखने का प्रयत्न करेंगे तो आप इस समाज के लिए दस लाइन बोलने का प्रयत्न करेगें ।
धन्यवाद............

मुकेश कुमार, संपादक, बाल सजग
कक्षा ७, अपना घर

प्रेस:- बाल सजग को हिंदुस्तान अख़बार का हौसला अफजाई

बाल सजग को हिंदुस्तान अख़बार का हौसला अफजाई
आज ४ मई को हिंदुस्तान अखबार ने अपने कानपुर संस्करण में बाल सजग को जगह देकर हम बच्चो के हौसला को बढाया है। http://epaper.hindustandainik.com/default.aspx?selPg=1135&page=04_05_2009_007.jpg&ed=426&BMode=100&artHigh=5
धन्वाद
बाल सजग टीम