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मंगलवार, 2 मार्च 2021

कविता:- काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में

"काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में"
 काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में। 
घूमूँ घर और बागवान में।।
मीठे मीठे फल मै खाऊँ।
अपने दोस्त संग मैं जाऊँ।। 
पंख अपने रोज धोकर।
रोज सज सवर कर।।
दुनियाँ की सैर कर आऊँ। 
काश मै उड़ता फिरुँ आसमान में।।
घूमूँ घर बागवान में। 
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है।

गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

कविता:- इस सुहाने मौसम में

"इस सुहाने मौसम में"
इस सुहाने मैसम में।।
पक्षी उड़ते हैं गगन में।।
इस सुहावने मौसम में।
खूबसूरत सारा जहाँ है।।
 हर किसी को यह मौसम भाता है।
इस सुहावने मौसम में।।
गाना सुनकर होते हैं मगन। 
काम करने में आता है आनंद।।
बिना रुके ही करते है।
 हर काम करते हैं अराम से ख़त्म।।
इस सुहावने मौसम में।
पक्षी उड़ते हैं गगन में।।
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है।
 

बुधवार, 24 फ़रवरी 2021

कविता:-आज मैं जो हूँ

 "आज मैं जो हूँ"
आज मैं जो हूँ। 
वाकय में मैं हूँ।।
खुद पे यकीन नहीं होता।
कि मै एक इंसान हूँ।।
मेरा कर्तव्य क्या है। 
मैं किसके लिए जी रहा हूँ।।
मुझे खुद ही नहीं पता।
क्या करुँ क्या न करुँ।।
किसके लिए करुँ और क्यों करुँ।
ये सवाल मन में हैं रहता।।
लेकिन जीना ही।
सबका मकसद होता है।।
कैसे जीना होता है।
उसे पता नहीं होता है।।
आज मैं जो हु।
वाकय में मैं हूँ।।
कविः- रविकिशन, कक्षा- 11th, अपना घर, कानपुर,

सोमवार, 22 फ़रवरी 2021

कविता:- वह अनजान है

"वह अनजान है"
वह अनजान है।।  
इस दुनियाँ से।।  
 उसे कुछ मत कहना।
घुम लेने दो दुनियाँ उसको।।  
पता तो चले यह कैसा है।
कैसा इसका रंग है ।।  
कैसा इसका रूप है।
देख लेने दो दुनियाँ उनको 
उसे कुछ मत कहना।
बेजान है उसके चेहरे।।  
देखो तो ये हैं कैसे।
 वो अनजान है।।  
इस दुनियाँ से।
 उसे कुछ मत कहना।।  
 
कविः -शनि कुमार ,कक्षा -9th ,अपना घर,कानपुर,
कवि परिचय :- ये शनि कुमार है। जो बिहार के रहने वाले है। इस समय अपना घर हॉस्टल में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे है।  ये पढ़ने में बहुत अच्छे है।ये पढ़ लिखकर अपने परिवार और समाज के लिए काम करना चाहते है। इनको कविता लिखना पसन्द है।
 

रविवार, 21 फ़रवरी 2021

कविता:-तितली रानी तितली रानी

"तितली रानी तितली रानी"
तितली रानी तितली रानी।
कितनी सुन्दर तुम्हारी कहानी।।
फूल-फूल पर जाती हो।
 सबका रस पी जाती हो।।
फूल-फूल मुश्कुराते हैं।
सभी को पास बुलाते हैं।।
तितली रानी तितली रानी।
पीती है रस और बताती है पानी।।
तितली रानी है बड़ी श्यानी।
 कितनी सुन्दर तुम्हारी कहानी।।
  तितली रानी तितली रानी।
 कविः-गोविंदा कुमार, कक्षा - 4th, अपना घर, कानपुर, 
कवि परिचय -ये गोविन्दा कुमार हैं। जो बिहार के रहने वाले हैं। इनको कविता लिखना पसंद है।  

शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

कविता:-आज मै घर से बाहर निकला हूँ

 "आज मै घर से बाहर निकला हूँ"
आज मै घर से बाहर निकला हूँ।
अपने मंजिल की तलाश में।।
ना कोई अपना है यहाँ। 
और ना ही कोई घर ठिकाना ।।
बस हम यूहीं चलते जा रहें हैं।
कब तक चलना है ये तो पता नहीं ।।
घर द्वार छोड़कर मै आया हूँ।
अपने उस मंजिल को पाने ।।
 रुक अब सकता नहीं।
और न ही मुँह मोड़ सकता हूँ ।।
बस मै आपने लक्ष्य की खोज में।
रुकना तो चाहता हूँ मगर।।
पर मै रुक नहीं सकता।
कठिन डगर की मेहनत से।।
मुख मोड़ नहीं सकता। 
 कविः- नितीश कुमार, कक्षा -10th ,अपना घर, कानपुर,
 
कवि परीचय : शांत स्वभाव के नितीश कुमार बिहार के नवादा  जिले से अपना घर में पढ़ाई के लिए आये  हैं। इन्हें कविता लिखना पसंद है।
 
 

सोमवार, 25 जनवरी 2021

कविता:- मोती सी चमक

"मोती सी चमक"
मोती सी चमक।
घासों में नजर आता है।।
वह मनोरम खुशबू।
सिर्फ फूलों से महक आते है।।
चाँद की रोशनी में भी।
सितारे नजर आते है।।
वह ओश की बूंद।
दरवाजे पर दस्तक दे जाते है।। 
मै रोज टहलता हूँ सुबह।
कोहरा ही कोहरा नजर आता है।।
इस ठंडे हवा के झोकों से। 
ओश फिसल जाता है।।
 और जमीन पर गिरकर। 
मिट्टी के संग मिल जाता है।।
कवि : सुल्तान कुमार , कक्षा - 6th , अपना घर, कानपुर  
कवि परिचय : यह कविता सुल्तान के द्वारा लिखी गई है। जो की बिहार के रहने वाले हैं। सुल्तान कवितायेँ बहुत अच्छी लिखतेहैं। सुल्तान पढ़ाई के प्रति बहुत ही गंभीर रहते हैं।  
 

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

कविता:- कल अब कहाँ है आता

 "कल अब कहाँ है आता"
कल अब कहाँ है आता।
कल-कल करके काम है टल जाता।।
लाखों लोग रखते है इस पर भरोसा।
यह दिन होता है हर एक लिए अनोखा।।
कई जीवन है बस इसी पर टिकी।
कहीं चली न जाये यह कल फीकी।।
कल अब कहाँ है आता।
उगता सूरज अब रोज है ढल जाता।।
आती है वही रात और सवेरा।
सोच रहा हूँ कल कब आएगा मेरा।।
कल अब कहाँ है आता।
कल-कल करके काम है टल जाता।।
कविः- कुलदीप कुमार, कक्षा -9th, अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह हैं कुलदीप कुमार जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं।  कुलदीप पढ़ाई में बहुत अच्छे हैं।  कुलदीप एक नेवी ऑफिसर बनना चाहते हैं।  कुलदीप अपनी कविताओं से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं।  इनको  क्रिकेट खेलना पसंद है
 

सोमवार, 4 जनवरी 2021

कविता:- बहती हवाएँ कुछ कहती हैं

"बहती हवाएँ कुछ कहती हैं"
बहती हवाएँ कुछ कहती हैं।
बहते वक्त किसी की नहीं सुनती हैं।।  
कभी सर-सर तो कभी भर-भर।
कभी ठण्डी तो कभी बंजर।।
ठण्ड में तो सिकुड़ ही जाती।
गर्मी में अपने को फैलाती।।
बसन्त में मन्द-मन्द बहती। 
गर्मी में अपने को लू है कहती।।  
सुबह-शाम शान्त है रहती।
दोपहर में अपने को कुछ और कहती।।
  कविः -प्रांजुल कुमार ,कक्षा -11th ,अपना घर ,कानपुर ,

कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

कविता:- कोरोना भाई तुम क्या हो यार

"कोरोना भाई तुम क्या हो यार"
कोरोना भाई तुम क्या हो यार।
एक बार तो बता दो अपना आकर।।
ताकि मै सोचु इस पर विचार।
तैयार करू वैक्सीन हजार।।
रोड पर जाना मुश्किल हो गया।
क्रिकेट ग्राउण्ड भी सो गया।।
मौज मस्ती के दिन चले गए।
दोस्तों से मिले दिन हो गए।।
नो प्रॉब्लम कोरोना भाई।
लगता  है करनी पड़ेगी धुलाई।।
घर में सैनिटाइजर लगाऊंगा।
एक बार नहीं बार-बार हाथ को।।
धोकर तुझे भगाऊंगा।
कोरोना भाई तुम क्या हो यार।।
एक बार तो बता दो अपना आकर। 
कविः-प्रांजुल कुमार, कक्षा - 11th, अपना घर, कानपुर,
 
 
 
कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत
अच्छा लगता है।
 

शनिवार, 28 नवंबर 2020

कविता:- हिन्दी भाषा हमसे है

"हिन्दी भाषा हमसे है"
हिन्दी भाषा हमसे है।
हम है उनके रक्षक।।
वक्त पे साथ दिया मेरा। 
बन के हिन्दी के अक्षर।।
हिन्दी आसान लगता बोलना। 
वो हम कहा करते थे।।
लेकिन जितना कठिन हिन्दी है।
 उतना कोई भाषा नहीं।।
हिन्दी हम लोगो के दिलो में बसा है।
हमारी रगो में दौड़ता है।।
तभी तो मेरा हिंदुस्तान बना। 
हिन्दी पर एक आंच न आने देंगे।।
हिंदी भाषा हमसे है।
हम है उनके रक्षक।।
कविः- रविकिशन कुमार, कक्षा -11th, अपना घर, कानपुर,

कवि परिचय : यह कविता रविकिशन के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक हिन्दी  है।  रविकिशन बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं।  रविकिशन को कवितायेँ लिखने में बहुत रूचि है।  

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

कविता:- एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है

"एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है"
एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है।
हर एक इंसान से ये संसार बना है ।।
 खुश है यहाँ तो कोई दुःख में ।  
इन्ही पंक्तियों से ही ब्रांड सजा है ।। 
जिंदगी जीने के लिए कोई परिश्रम कर रहा है। 
 जिंदगी को छीनने का सड़यंत्र रच रहा है ।।
बिना लड़े बिना दूसरों को दुःख पहुचाये।
ये संसार कहाँ खुशहल रह रहा है।।
एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है। 
हर एक इंसान से ही ये संसार बना है।।
कविः- समीर कुमार, कक्षा -10th, अपना घर, कानपुर,  
 
 

शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

कविता:- फिर भी फूल मुस्कुराता है

"फिर भी फूल मुस्कुराता है" 
 
जितने भी कांटे हो पेड़ों में।
गिर जाते पत्ते हवा के अंधेड़ो में।।
पानी के लिए तरस जाये।
बिना छाँव के धूप में ही रह जाये।।
फिर भी फूल मुस्कुराते है।
पेड़ों की डालियाँ चर-चराने लगे।।
कोयल बैठ गुनगुनाने लगे।
 पत्तियाँ पेड़ को छोड़ जाने लगे।।
 पेड़ फिर भी भँवरों को बुलाता है।
फूल हमेश मुस्कुराता है।।
मीठी शहद से लेकर शहीद तक जाता है।
बिना रोये पैरों तले कुचला जाता है।।
कभी दो जोड़ो को माला बन मिलाता है।
कभी कचरे के ढेर में सिमट जाता है ।।
फिर भी फूल मुस्कुराता  है। 

कविः-प्रांजुल कुमार, कक्षा - 11th, अपना घर, कानपुर,
 
 


कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।