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बुधवार, 13 जनवरी 2021

कविता:- कोरोना आया पूरा कहर मचाया

"कोरोना आया पूरा कहर मचाया"
कोरोना आया पूरा कहर मचाया।
एक न दो पूरी दुनियाँ हिलाया।।  
न बाहर जाना न किसी से मिलना। 
 मास्क लगा के हमेशा चलना।। 
बार-बार हाथ धोना।
 सभी को पता है आ गया कोरोना।।  
जगह-जगह किया जा रहा छिड़काव।
जीने के लिए सीखना पड़ेगा नया पड़ाव।।  
घर की सफाई में नहीं छोड़ना है कोई कसर।
नहीं तो कोरोना करेगा असर।।  
 कविः- अखिलेश कुमार, कक्षा -10th, अपना घर, कानपुर,
 
कवि परिचय : यह कविता अखिलेश के द्वारा लिखी गई है जिसका शीर्षक "कोरोना आया पूरा कहर मचाया"है। ये बिहार के नवादा जिले के रहने वाले है।
 

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

कविता:- एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है

"एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है"
एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है।
हर एक इंसान से ये संसार बना है ।।
 खुश है यहाँ तो कोई दुःख में ।  
इन्ही पंक्तियों से ही ब्रांड सजा है ।। 
जिंदगी जीने के लिए कोई परिश्रम कर रहा है। 
 जिंदगी को छीनने का सड़यंत्र रच रहा है ।।
बिना लड़े बिना दूसरों को दुःख पहुचाये।
ये संसार कहाँ खुशहल रह रहा है।।
एक दूसरे के वास्ते हर इंसान बना है। 
हर एक इंसान से ही ये संसार बना है।।
कविः- समीर कुमार, कक्षा -10th, अपना घर, कानपुर,