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सोमवार, 4 जनवरी 2021

कविता:- बहती हवाएँ कुछ कहती हैं

"बहती हवाएँ कुछ कहती हैं"
बहती हवाएँ कुछ कहती हैं।
बहते वक्त किसी की नहीं सुनती हैं।।  
कभी सर-सर तो कभी भर-भर।
कभी ठण्डी तो कभी बंजर।।
ठण्ड में तो सिकुड़ ही जाती।
गर्मी में अपने को फैलाती।।
बसन्त में मन्द-मन्द बहती। 
गर्मी में अपने को लू है कहती।।  
सुबह-शाम शान्त है रहती।
दोपहर में अपने को कुछ और कहती।।
  कविः -प्रांजुल कुमार ,कक्षा -11th ,अपना घर ,कानपुर ,

कवि परिचय :- यह हैं प्रांजुल जो की छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं और कानपुर के अपना घर नामक संस्था में रहकर अपनी पढाई कर रहे हैं।  प्रांजुल को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है।  प्रांजुल पढ़कर एक इंजीनियर बनना चाहते हैं और फिर इंजीनियर बनकर समाज के अच्छे कामों में हाथ बटाना चाहता हैं। प्रांजुल को बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है।

मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

कविता :- वह मुश्किलों में भी प्रयास करता था

  "वह मुश्किलों में भी प्रयास करता था"
वह मुश्किलों में भी प्रयास करता था।
हर चीज से वो आश रखता था।।
निरंतर चलने की बात हमेश।
लोगों से कहा करता था।।
कुछ खास था उसमे।
हर परिस्थिति में रहना जनता था।।
चुनौतियों और बाधाओं से।
हस्ते हुए लड़ जाता था।।
चढ़ा था जुनून कुछ कर गुजर जाने का।
हौशलों से बुलंदियों को छूने का।।
मन में जरूर ये बात रखता था।
लक्ष्य है मेरा कर्मभूमि।।
वह मुश्किलों में भी प्रयास करता था।
हर चीज से वो आश रखता था।।
 कविः - विक्रम कुमार ,कक्षा -10th ,अपना घर, कानपुर,
 

कवि परिचय : यह कविता विक्रम के द्वारा लिखी गई है।  विक्रम बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं। विक्रम को कवितायेँ लिखना बहुत पसंद है। और वह अपनी प्यारी -प्यारी कविताओं एकत्रित कर उन्हें एक किताब में प्रकाशित करवाना चाहता है।  विक्रम एक रेलवे डिपार्टमेंट में काम करना चाहते हैं।