. बाल सजग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
. बाल सजग लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 21 जुलाई 2019

कविता : नोटबन्दी

" नोटबन्दी "

लोग हो गए हैं बेहाल, 
पुराने नोटों का हुआ हलाल | 
अमीर हो गए बेमिशाल ,
गरीब हो गए लालम - लाल | 
क्योंकि पुराने नोटों के हो गए जमाना, 
लोग एक - दूजे के हुए परमाना | 
मोदी ने किया पुराने नोटों का खात्मा, 
काले  धंदे वालों की शांत हुई आत्मा | 
कवि : कामता  कुमार , कक्षा : 8th ,अपनाघर

कवि परिचय : यह कविता कामता ने नोटबंदी पर लिखी है जिस समय लोगों के हालात बहुत ही गंभी थे | कामता ऐसे ही रोचक भरी कवितायेँ लिखने के लिए जाने जाते हैं | कामता बिहार के निवासी हैं |

शुक्रवार, 28 जून 2019

कविता : छोटा बन जाऊँ

" छोटा बन जाऊँ "

मन करता है छोटा बन जाऊँ,
माँ का प्यार दोबारा पाऊँ |
उंगली पकड़कर चलना सिखाती,
हर अनजान मोड़ पर राह दिखाती |
`हर गलती को मेरी बक्श दे,
जीवन में मुझे ढेरों प्यार दे |
ममता की साया में रहूँ ,
माँ से मैं दिल की बात कहूँ  |
बचपन बहुत ही कीमती होता है,
जिसको नसीब नहीं वह रोता है |
बचपन के दिन नादान होते हैं,
लेकिन बचपन के बाद खूब रोते हैं |
काश सभी को बचपन नसीब हो,
एक छोटा बच्चा माँ के करीब हो |
                                                                                                       
                                                                                                          नाम : समीर कुमार , कक्षा : 9th , अपना घर



कवि परिचय : यह कविता द्वारा लिखी गई है जो की प्रयागराज के निवासी हैं को कवितायेँ लिखने का बहुत शौक है और वह ढेरों कवितायेँ लिख चुके हैं | समीर को प्रेरणा भरी कवितायेँ लिखना बहुत अच्छा लगता है जिससे की लोगों को प्रेरणा मिले | समीर इसके अलावा संगीत भी लिखते हैं |



रविवार, 28 अप्रैल 2019

कविता : बाल मजदूर

 "बाल मजदूर "

नाजुक हाथों ने क्या कर दिया पाप, 
जन्म से ही दे दिया कामों का वनवास |
कलियों जैसी खिलने वाले उस मासूम, 
जिंदगी को कर दिया तबाह |
हर बचपन के लम्हों को, 
हर सजाये हुए सपनों को |
दो मिनुट में कर दिया राख,
दर्दनाक जिंदगी उसे तडपा दिया |
बचपन के खिलौनों की जगह,
 जिंदगी से लड़ना सिखा दिया | 
पेन ,किताब और कॉपी की जगह, 
कम का बोझ इर पर लाद दिया |

नाम : विक्रम कुमार , कक्षा : 7 , अपनाघर


कवि परिचय : यह हैं विक्रम जिन्होंने यह कविता लिखी है, जो की बिहार के नवादा जिले के निवासी हैं | विक्रम को कवितायेँ अच्छे से लिखी आती है | विक्रम ज्यादातर समाज पर लिखते हैं और उस कविता के माध्यम से लोगों को जागरूक करने की कोशिश करते हैं | बड़े होकर एक नेक इंसान बनना चाहते है |  

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

कविता : पान ने बनाया सबसे बड़ा "डान"

पान ने बनाया सबसे बड़ा " डान "


एक था पान का पत्ता
दिखने में लगता जैसे लत्ता
सब इसको खाते कलकत्ते में,
अधिक दबाते इसको मुंह में।
पान सबका मुंह करता लाल,
तब तक मेरे फोन में आई काल।
हमने उठाया और बोला कौन ?,
उसने बोला मै हूँ मुंबई का " डान"।
फिर मैंने बोला अरे चुप हो जा मौन,
मै हूँ इस भारत का सबसे बड़ा " डान" ।

लेखक: चन्दन कुमार, कक्षा ४, अपना घर