लेखक मुकेश बाल गीत बाल कहानियाँ बाल कविताये किस्से कहानियाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
लेखक मुकेश बाल गीत बाल कहानियाँ बाल कविताये किस्से कहानियाँ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 17 जून 2010

कविता :बंदरिया नाच दिखाती

बंदरिया नाच दिखाती

एक बंदरिया नाच दिखावे ।
बन्दर खड़े-खड़े पछतावे ॥
मदारी रोज पैसा कमावे ।
बंदरिया बन्दर को चिढावे ॥
एक दिन बन्दर गुस्सा हो बैठा ।
बंदरिया बोले ले खाले भांटा ॥
बन्दर चिढ़कर गुस्से में बोला ।
चुप हो जा वरना जाग जायेगा मेरा शोला ॥
फिर भागेगी किसी के बरात में ।
तू खायेगी वहां पर छोला॥
मैं हो जाउंगा वहां पर भोला।
तू खाएगी तो हो जायेगा बवाल।।
मै कर दूगा जा कर बारात में धमाल।
लोग कहेगे क्या है इसका कमाल।।
एक बंदरिया नाच दिखावे।
बन्दर खड़े खड़े पछतावे।।
लेखक : मुकेश कुमार
कक्षा ९
अपना घर

सोमवार, 15 मार्च 2010

कविता: होली

होली
होली आई होली आई
रंग बिरंगी होली आई
सबके मन में खुशिया छाई
साल में एक बार होली आती हैं
सबका मन बहलाती है
हरी ,नारंगी रंग लाती है
बच्चे पिचकारी मे रंग भरते है
रंग डालने मे किसी से नहीं डरते है
बच्चो का त्यौहार यह होता है
बच्चे रंग को नहीं खोता है
ऊचा , नीच का भाव छोड़कर
जाती , पाती का भाव छोड़कर
आपस मे मिल जाते है
एक दुसरे को अबीर लगाते है
खूब मिठाई खाते है
होली आई होली आई
रंग ,बिरंगी होली आई
गाँव ,शहर में खुशियाँ छाई
धूम ,धड़ाका खूब मचाई
होली आई होली आई
लेखक : मुकेश कुमार
कक्षा : ८
अपना घर ,कानपुर

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

कविता सुनो भाइयों और बहिनों

सुनो भाइयों और बहिनों
सुनो-सुनो भाई बहाना,
सावधान तुम रहना....
चोरो धोखे बाजों से सावधान रहना,
अपहरण से तुम बचना....
शहर में अकेले न घूमना,
कितने बच्चे किडनैप हो गये....
अपहरण करने वाले पकड़े गये,
मासूम बच्चों को मार डाला.....
न्यायलय में न कोई अपील करने वाला,
सुनो-सुनो सब भाई बहना.....
सावधान तुम रहना,
जिसका मासूम बच्चा मारा गया.....
उनसे रात में सोया न गया......
लेखक कविता मुकेश कुमार कक्षा ८ अपना घर कानपुर