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सोमवार, 23 अप्रैल 2012

कविता :-अँधेरी रात

अँधेरी रात
रात के अँधेरे में ....
दिन के सवेरों में ,
मैं सो रहा था ....
अचानक सपनों में ख्याल आया,
हमें उड़ते हुए पक्षियों का ध्यान आया....  
अपने जिन्दगी का एक सवाल उठाया,
तुम कब तक ऐसे जाते रहोगे....
क्या तुम मंजिल पाओगे,
होनी चाहिए कोई एक ख्वाइस....
जिसमें हो मंजिल और लक्ष्य का रहस्य,
नाम :लवकुश कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर
 

गुरुवार, 15 मार्च 2012

कविता : मन को जान लूँ

 मन को जान लूँ


कविता मैं सोच रहा था ,
मन की बाते खोज रहा था....
 बातों को गहराई से सोचने लगा ,
कविता भी मेरी आगें बनती गयी .....
 सोचा मैने और कविता को बडाऊ,
जिससे की थोड़ा मैं और दिमाग को लड़ाऊ ......
कविता मैं सोच रहा था ,
मन की बातें सोच रहा था......

लेखक : लवकुश कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर  

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

कविता महात्मा गांधी

महात्मा गांधी

गांधी जी ने की थी जो लड़ाई,
न मारी किसी को गोली न दी गाली....
प्रेम और अहिंसा के बल से,
दिला दी उन्हों ने आजादी....
चले गए अंग्रेज छोड़ के ये देश ,
बापू हो गये दुनिया के प्यारे....
बापू ने बोली ग़ली -ग़ली पर एक ही बोली,
हिन्दुस्थान हमारा सबसे न्यारा....



लेख़क लवकुश कक्षा ७ अपना घर कानपुर

बुधवार, 26 मई 2010

कविता :हवा चली

हवा चली

हवा चली भाई हवा चली ।
दूर-दूर तक हवा चली ॥
ठंडी गर्म है हवा चली ।
हवा चली भाई हवा चली ॥
गर्मी में तो आम गिरेगें ।
आमों के हम स्वाद चाखेगें ॥
आमों के हम पेड़ लगायेंगे ।
हवा चली भाई हवा चली ॥

लेखक :लवकुश कुमार
कक्षा :७
अपना घर

रविवार, 23 मई 2010

कविता हवा चली

हवा चली
हवा चली भाई हवा चली,
दूर दूर तक हवा चली....
हवा चली भाई हवा चली,
गर्मी में तो आग गिरे....
आमो को तो हम खाये,
अपने घरों के पास पेड़ लगाये....
पेड़ पौधों को लगाने से प्रदुसन न होता,
हवा चली भाई हवा चली.....
लेखक लवकुश कक्षा ६ अपना घर कानपुर