मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

कविता : काश मैं एक रौशनी होता

" काश मैं एक रौशनी होता "

काश मैं एक रौशनी होता , 
संसार को रौशनी दे पाता | 
ताकि हर व्यक्ति देख पाता,
चाहे हो काना चाहे आनर | 
सबको मंजिल मैं दिखाता,
खुद उसके साथ मैं जाता | 
वो अपना रास्ता तय कर पाता,
मैं उसका साथ निभा पाता | 
 काश मैं एक वो  रौशनी, 
संसार को रौशनी दे पाता |

नाम : समीर कुमार , कक्षा 7th , अपनाघर


कवि परिचय : ह हैं समीर कुमार जो की इलाहाबाद से अपनाघर पढ़ने के लिए आये हुए हैं | माता पिता ईंट भट्ठों में निकासी गिरी का काम करते हैं | पढ़ाई में अपना बहुत अफर्ट देते हैं | कवितायेँ लिखने के साथ - साथ संगीत भी बहुत अच्छा  | बहुत ही नेक और चंचल बालक हैं समीर कुमार |  

कोई टिप्पणी नहीं: