सोमवार, 3 दिसंबर 2012

शीर्षक : मजदूर

      मजदूर 
 गाँव से दूर .....
एक सुबह को मजदूर ।
आज की दुनिया .....
आज का मजदूर ।।
आज के भी ठेकेदारों ..
 का है कोई जवाब नहीं ।
 एक रात ऐसी नहीं ....
 जो मिले कवाब नहीं ।
 मजदूरों पर क्या बीतती ....
 क्या है उनकी मजबूरी ।
 जो इस तरह जुटकर ....
 दिन -रात करते मजदूरी ।
 नहीं उठता है फावड़ा ....
 फिर करते है काम ।
 क्या इन सब न्र नहीं सुना ....
 एक शब्द भी होता है ''आराम''।।
 आराम की दुनिया में ....
 हराम का पैसा है ठेकेदार ।।
 बेच दो इनको और ....
 छीन लो अपना अधिकार ।।
  गाँव से दूर .....
  एक सुबह को मजदूर ।
  आज की दुनिया .....
  आज का मजदूर ।।
नाम : सोनू कुमार 
कक्षा : 11
अपना घर , कानपुर 

रविवार, 2 दिसंबर 2012

फिर भी मेरा भारत महान

     फिर भी मेरा भारत महान
आजाद हिंदुस्तान की आजाद कहानी ,
हिंदुस्तान की है ये जवानी ,
अनगिनत होते है अत्याचार ,
बनकर नेता करते भष्ट्राचार ,
 आजाद हिंदुस्तान की आजाद कहानी ,
हर नेता करता मनमानी ,
माँ बेटियो पर होते अत्याचार ,
कन्हा गया वो अब शिष्टाचार ,
आँखों मे वो डर बसा है ,
  आँखों मे वो इतिहास रचा है ,
बाहर निकलने  मे भी लगता है डर ,
ये मासूम बेचारे  अब जांए किधर ,
नरक से बद्तर हो गया हिन्दुस्तान ,
  फिर भी कहते हम ,मेरा भारत महान ,
नाम : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

शनिवार, 1 दिसंबर 2012

शीर्षक : दुष्ट दरिन्दे

        दुष्ट दरिन्दे 
कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
अपने लिए अपनो को लूटा करते है ।।
वो चिल्लाती रहती नहीं - नहीं  ,
फिर भी हम तरस नहीं करते है ।।
फिर कहते है जाने दो यार ,
अपनी बहन कौन , पड़ोसी की है ।।
कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
उनके भी कुछ अरमान होंगे ।।
नहीं सोचते हम उनकी वर्तमान की ।
कैसे वो रहेगी क्या करेगी ।।
नहीं सोचते उनके परिवार के लिए ,
कि उन पर क्या बीतेगी ।।
नहीं सोचते उनके लिए ,
कैसे वो घुट -घुट जियेगी ।।
 कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
 अपने लिए अपनो को लूटा करते है ।।
नहीं सोचते उनके समाज के लिए ।
क्या वो मुंह दिखाने लायक रहेगी ।।
 कुछ लोग तो दुष्ट  दरिन्दे है ।
  अपने लिए अपनो को लूटा करते है ।।
नाम : सागर कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर ,कानपुर 

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

शीर्षक : 2012

      "2012" 
 
2012 बड़ा है खतरनाक ।
अमेरिका मे ले आया तूफान ।।
2012 ने दिखा दी अपनी शान ।
जाने कितने मारे गए बेजान ।।
भारत में 2012 का रहा जलवा ।
मुंबई नगरी में मचा दी तबाही।।
इसकी हम कैसे दी गवाही ।
कितने फिल्म स्टारों को ले गया अपने साथ ।।
लेकिन 2012 ने नहीं छोड़ा हमारा साथ ।
2012 को जब याद किया जायेगा ।।
सैंडी तूफान की याद दिलाएगा ।
2012 बड़ा है खतरनाक ।
अमेरिका मे ले आया तूफान ।


नाम : मुकेश कुमार , कक्षा : 11, अपनाघर ,कानपुर 

शीर्षक :लक्ष्य

    "लक्ष्य " 

सभी को एक लक्ष्य ,
की तलाश होती  है
लक्ष्य तक पहुँचने के लिए ,
एक कठिन राह होती है ...
सभी को कठिनाइयों की राहों से,
एक दिन गुजरना पड़ता है ......
कोई राहों से गुजर जाता है ,
तो कोई राहों से भटक जाता है ।
सभी को एक लक्ष्य ,
की तलाश होती  है ।

नाम : ज्ञान कुमार, कक्षा : 9, अपना घर , कानपुर 

गुरुवार, 29 नवंबर 2012

शीर्षक : भूखा मजदूर

    " भूखा मजदूर"

अगर न होते बाग - बगीचे ।
और न होते खेत - खलिहान ।।
कहाँ से आता गेंहूँ चावल ।
कैसे भरता हम लोगो का पेट ।।
किसान उगाता है सब्जी।
गेंहूँ, चावल, और भांटा ।।
किसान अपनी मेहनत करके खाता है ।
और हमें खिलाता है ।।
नाम : जितेन्द्र कुमार, कक्षा : 9, अपना घर , कानपुर  

बुधवार, 28 नवंबर 2012

शीर्षक : जिंदगी डस्टबीन

      "जिंदगी डस्टबीन" 

कैसी ये जिंदगी है ,जो  डस्टबीन की तरह लगती है ।
डस्टबीन की तरह लुढ़कती है ।।
लुढ़क - लुढ़क कर एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचती है ।
पहुंच- पहुंच कर कूड़े करकट को ढूँढती है ।।
कैसी ये जिंदगी है ,जो  डस्टबीन की तरह लगती है ।
और ये उधर ,इधर घूमा करती है ।।
कूड़े कर कट को ढूँढा करती है ।
कैसी ये जिंदगी है ,जो  डस्टबीन की तरह लगती है ।

नाम : सागर कुमार कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर

मंगलवार, 27 नवंबर 2012

शीर्षक : कवि की छवि

   "कवि की छवि" 
 
एक था बहुत बड़ा कवि ।
जब हमने देखी उसकी छवि ।।
उड़ गए होश हमारे ,
गश खाकर हम गिरे,
देख के हमको दौड़े लोग बेचारे ।
मै तो था बेहोश ,
पानी ही पड़ते हमको आया होश ।।
कवि ने पूछा अरे ओ भईया ,
हमने बोला क्या रे कविया ?
सुनकर हमारी ये बतियाँ ,
कवि के गुस्से से लाल हो गई अँखियाँ ।
काले बादलो की भाँती मेरे पास में छाया ,
उसका यह रोब हमरे मन को भाया ।
हमने कहा अरे ओ भईया ,
सुन लो तनि हमरी ये बतिया ।
हमने सुना था  कि तुम हो शांत रस के कवि ,
तो शान्ति के जैसी होगी तुम्हारी छवि ।
पर तुम तो निकले रौंद्र रस के कवि ,
तुमने बदल दी हमारी छवि ।।
नाम : आशीष कुमार , कक्षा : 10, अपना घर ,कानपुर 

सोमवार, 26 नवंबर 2012

शीर्षक :जिंदगी

   " जिंदगी"
 
बड़ी तो कठिन है जिंदगी ।
वक्त पर चलना सिखाती है जिंदगी ।।
लक्ष्य जो तेरे हाथ मे है ।
उस लक्ष्य तक पहुचाती है जिंदगी ।।
तेरे सभी सपनों को ।
सच में बदलती है जिंदगी ।।
बन गया लक्ष्य तेरा तो ।
झूम के हंसती , गाती है जिंदगी ।।
वक्त से पहले अगर संभल न पाये ,
तो हर शाम भूखो सुलाती है जिंदगी ।।
नाम :धर्मेन्द्र कुमार, कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर

शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

शीर्षक : कुछ तो सीखो

  "कुछ तो सीखो"

बहुत कुछ सीखने को मिलता है ।
हमें अपने वातावरण मे ।।
बन जाता है मौसम अचानक ।
पानी गिराने लगता है गगन से ।।
नहीं किसी को पराया समझाना ।
कभी - कभी  धूप में छाया भी करना ।।
लेकिन नहीं सीख  पाते है हम कुछ ।
अपने वातावरण और गगन से ।।
अपने ब्रम्हाण्ड और धरती से सीखो ।
एक दूसरे की सहायता करना सीखो ।।
नाम : ज्ञान कुमार, कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर 

बुधवार, 21 नवंबर 2012

शीर्षक : यह भी जिंदगी

"यह भी जिंदगी"

क्या इंसान भी वो होते है ।
जो भूखे ही सोते है ।।
नहीं है उनका कोई सहारा ।
भूखा रहता उनका पेट बेचारा ।।
जो देता है उनको दान ।
वो करते है उनका सम्मान ।।
भलाई का जमाना नहीं रहा।
युग कलयुग का चल रहा।।

नाम : ज्ञान कुमार , कक्षा : 9, अपना घर ,कानपुर