शनिवार, 10 दिसंबर 2011

तारे और सितारे


कविता -तारे और सितारे 
 रात में तारे ,
 दिन में सितारे.....  
 कहाँ से आते हैं ,
कौन हैं इनको लाते.....
 यदि पता चले हमको ,
 तारे सितारे तोड़ के बांटू  सबको.......
 चाहे दिन हो या हो रात  ,
 न करने देगे चंदा सूरज से बात......
 जब मन करेगा तब उनको निकालेगे,
 जहाँ अँधेरा होगा वहां उजाला कर देगे......
 लेखक - आशीष कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर, कानपुर 

गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

कविता : मन

मन
मन क्यों मचलता है,
जाने किधर चलता है .....
हर समय ये मन,
कुछ न कुछ करता है .......
जहाँ कहीं कुछ होता ख़ास ,
मन करता जाने को पास .....
जहाँ पुराना कुछ भी देखें ,
मन न जाने क्यों होता उदास ......
मन हमेशा कहता है ,
सबसे अलग कुछ करने को .......
मगर ये आलस कहता है,
बस करो अब रहने दो ......
मन क्यों मचलता है ,
जाने किधर चलता है ......
हर समय ये मन ,
कुछ न कुछ करता है  ......

लेखक : सोनू कुमार 
कक्षा : 10 
अपना घर 

रविवार, 27 नवंबर 2011

बच्चा

बच्चा 
 वे  कहते है बच्चा ,
 हम में, तुम में कौन है? अच्छा..... 
 किलकारी मार कर हंसना है ,
 गोद में कभी नहीं आता हैं.....
अन्दर- अन्दर मुस्काता हैं ,
 तन का हैं कितना अच्छा .....
 मुस्काता है मन के अन्दर ,
 भेद भाव बिलकुल नहीं समझता.....
 लगा हैं लार चुवाने में ,
 कभी नहीं हम उसको लेते हैं.....
हमेसा  गोद को रोता हैं ,
  वे कहते हैं बच्चा ......

 लेखक - जीतेन्द्र कुमार
 कक्षा - ८ अपना घर ,कानपुर

दूर देश से आया हैं बादल

दूर देश  से आया हैं  बादल

दूर देश  से आया हैं  बादल,
 दिन दुपहरियां में छाया हैं बादल......
 कितनी गर्मी हो रही हैं ,
 लोग निकलना भी भूल गए हैं.....
 घर में ही सो रहे हैं  ,
 किरणों से थे सब घायल......
 दुपहरियां में भी छाया हैं बादल,
 दूर देश से आया हैं बादल......
 लेखक - चन्दन कुमार 
 कक्षा - ६ अपना घर ,कानपुर

 

बस्ती में मस्ती

बस्ती में  मस्ती 
 बस्ती झूमे मस्ती में ,
 बच्चे घूमे बस्ती में .....
  बाँकी जो बचे बस्ती में,
 वो भी जाते मस्ती में ......
 बूढ़े बैठे खटिया  में ,
 कर रहे बाते मस्ती में.....
 जो भी दिखा बस्ती में ,
 कर रहा मस्ती बस्ती में....
 बस्ती झूमे मस्ती में ,
 बच्चे घूमे बस्ती में ......
 लेखक - अशोक कुमार 
 कक्षा -९ अपना घर,कानपुर

मंगलवार, 22 नवंबर 2011

कविता : जल

 जल 

जल से ही जीवन हमारा ,
उपयोग है बहुत इसका.....
इससे ही जीवन सबका,
उपयोग हैं करते हम जिसका,
गली,शहर,मुहल्लों में तो .....
बर्बाद होता है ये पानी ,
अब एक दिन येसा आयेगा....
जब खत्म हो जायेगी इसकी कहानी,
जल से ही है पेड़ों का जीवन ......
आक्सीजन हैं पाते जिससे,
काम बहुत आता है ये जल .....
जीवन हैं पाते हम जिससे ,

लेखक : धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

सोमवार, 21 नवंबर 2011

गलती स्वीकारेगे

कविता -गलती स्वीकारेगे 
धमकियाँ कौन  देते हैं,
  नेता पड़े सोते हैं .....
गलती हमने नहीं की हैं,
 घूस हमने नहीं ली हैं ....
 कुछ गलती esee होती हैं,
jo sabako दुःख detee हैं ....
नहीं कयेगे ab ham गलती ,
yah हैं nara  kal  ka......
स्वीकारेगे apnee गलती,
yah हैं nara ab ka
.
धमकियाँ कौन  देते हैं,
  नेता पड़े सोते है......
 lekhak - gyan 
kaksha - 8 apna ghar ,kanpur 
 

बुधवार, 16 नवंबर 2011

कविता : आराम ही आराम

 आराम ही आराम 
एक सुबह कि आये शाम ,
जिसमें हो सिर्फ आराम ही आराम....
न करना पड़े कोई भी काम,
और हमें न करें कोई बदनाम....
न कोई डांटे न कोई चिल्लाये,
न कोई मुझसे काम करवाये...
हर दिन हो जाये येसा ही,
जिसमें केवल हो मजा ही....

लेखक : आशीष कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर 

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

कविता : सर्दी

 सर्दी 
सर्दी आयी सर्दी आयी ,
सबके मन में खुशियाँ लायीं...
अब पहनेगें नए-नए स्वेटर,
बैठेगें हम रजाई के भीतर ....
जब खायेगें हम बादाम-छुहारा,
तब भागेगा हमरा जाड़ा....
गरम-गरम पूड़ी सब्जी खायेगें,
स्कूल न जाकर घर पर मौज उडायेगें...
सर्दी है सबसे बढ़िया मौसम ,
जिसमें न होता किसी को कोई गम.....

लेखक : आशीष  कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर  

रविवार, 13 नवंबर 2011

सुन्दर प्रकृति

कविता - सुन्दर प्रकृति 
 कितनी बड़ी हैं यह प्रथ्वी हमारी ,
जिस पर हैं ये दुनिया सारी .....
हर तरफ इसके पानी हैं,
दुनिया जो जानी पहचानी हैं....
बिखरा पड़ा हैं यहाँ सौन्दर्य अपार,
फूलो की घाटी, हिमालय और पहाड़......
नष्ट न होने दो इस सौन्दर्यता को  ,
 ख़त्म करो न तुम इसकी जड़ता को .....
जम्मू के इस प्राकृतिक सौन्दर्य को ,
देख हर्षित होता हैं सबका मन .....
अच्छा लगता हैं सभी को ,
बस ऐसा ही जीवन .....
लेखक - धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा - ९ अपना घर ,कानपुर