लेखक :अशोक कुमार बाल कवितायें बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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रविवार, 1 अप्रैल 2012

कविता : सब कुछ खो गया

 सब कुछ खो गया


पंक्तियों की खोज में ,
शरारतें ही खो गयीं....
शरारतें खो जाने से ,
बचपन भी खो गया ....
इन सब के खोने से ,
मुस्कराहट ही चली गयी....
मुस्करानें का मन किया ,
लेकिन मन की चाहत खो गयी ....
पंक्तियों की खोज में ,
सारा संसार ही खो गया....


लेखक : अशोक कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर      

बुधवार, 21 मार्च 2012

कविता : चले गए चन्द्रमा के संग

 चले गए चन्द्रमा के संग 

चम-चम करती  चमक उठी यह चन्द्रमा ,
फैल गए तारे अंबर के आँगन में ......
देखा ना रहा गया पवन से ,
शुरु कर दिया उसने आवागमन .....
इतने में मेघनाथ को आया गुस्सा ,
उससे न सहा गया गुस्सा .....
चमक रहे थे जो तारे ,
चले गए चन्द्रमा के संग .......

लेखक : अशोक कुमार 
कक्षा : 9
अपना घर   

शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

कविता करो वन तैयार

करो वन तैयार
लगा लगा के व्रक्षों को ,
फिर से कर दो वन तैयार....
जिससे वह समय याद,
जिसमे होते गिद्द हजार.....
न होता प्रथ्वी को नुकशान,
लगा लगा के व्रक्षों को,
फिर दो वन तैयार......
जिसमे प्रथ्वी जाय वातानुकूल,
फिर से हो जाय वह हरियाली......
जिसे देख हवा चले सुहानी,
वह प्रथ्वी की पपड़ी......
फिर से हो जाय तैयार,
जिससे हो रही हैं गर्मी इतनी......
जिससे हयरान हैं मुल्क की आबादी,
लगा लगा के व्रक्षों को.....
फिर से कर दो वन तैयार,
लेखक अशोक कुमार कक्षा ७ अपना घर कानपुर