कविता :मुकेश कुमार बाल कविताएँ बाल कहानियां बाल गीत किस्से कहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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सोमवार, 1 अगस्त 2011

कविता : गंगा के उस पार चलें

गंगा के उस पार चलें 

 चलो-चलो अब सैर करें, 
गंगा के उस पार चलें....
गंगा के उस पार जायेगें,
मौज मस्ती करके आयेगें.....
हवा चलेगी ठंडी-ठंडी,
 मौसम होगा खूब सुहाना....
चलो-चलो अब सैर करें,
गंगा के उस पार चलें....
पानी होगा कितना निर्मल,
ठंडा और होगा शीतल....
 चलो-चलो अब सैर करें,
गंगा के उस पार चलें...

लेखक : मुकेश कुमार 
कक्षा : 10
अपना घर 

शुक्रवार, 18 जून 2010

कविता : मिर्चा और कददू

मिर्चा और कददू
मिर्चा भइया, मिर्चा भइया ।
कददू बोले राम-राम भइया ॥
कददू बोला मैं तुझे खा जाउंगा ।
मिर्चा बोला मैं तुझे चबा जाउंगा ॥
कददू बोला मैं इतना मोटा हूँ ।
मिर्चा बोला मैं सिर्फ छोटा हूँ ॥
मुंह में तेरे घुस जाउंगा ।
कडवाहट मुंह में फैला जाउंगा ॥
कददू यह सुनकर वहां से भागा ।
मिर्चा भइया सोकर जागा ॥

लेखक :मुकेश कुमार
कक्षा :
अपना घर

शनिवार, 27 मार्च 2010

कविता :प्यारे बच्चो आओ

प्यारे बच्चो आओ

आओ प्यारे बच्चो आओ ।
एक मेरी बात सुन जाओ ॥
पर्यावरण क्यों गंदा है ।
साफ इसे क्यों नहीं करते हैं ॥
अगर पर्यावरण साफ बनाना है ।
कूड़ा कचरा आदि नहीं फेकना है ॥
पन्नी का प्रयोग नहीं करना है ।
कपड़े का कोई झोला बनाओ न ॥
उसमें गुड-चीनी भर लाओ न ।
आओ प्यारे बच्चो आओ ॥
लेखक :मुकेश कुमार
कक्षा :
अपना घर

बुधवार, 17 मार्च 2010

कविता कड़ाके की ठंडी

कड़ाके की ठंडी
बड़ी कड़ाके की ठंडी आयी ,
साथ में अपने पानी लाई...
ओष भी घास में लायी ,
थोडा पानी भी लाया .....
ठंड से लोग बचते हैं,
घर से बहार नहीं निकलते हैं....
ठंडी को दूर भागते हैं,
अपने को स्वच्छ बनाते हैं.....
लेखक मुकेश कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

मंगलवार, 16 मार्च 2010

कविता चुहिया बीमार हैं

चुहिया बीमार हैं
आज रविवार हैं ,
चूहे को बुखार हैं....
चुहिया बीमार हैं,
डाक्टर बिल्ली दुश्मन हैं.....
वह अगर आयेगी,
तो हम दोनों को खा जायेगी.....
लेखक मुकेश कुमार कक्षा अपना घर कानपुर