गुरुवार, 11 नवंबर 2010

कविता : क्यों निराश बैठा हैं

क्यों निराश बैठा हैं
क्या हम सोच सकते हैं,
उस पक्षी की आहट।
जो बैठा है उस वृक्ष की डाल पर,
उसे आहट से परवाह नहीं ।
ये मरने के लिए बैठा हैं,
या फिर किसी का इंतजार कर रहा हैं।
न जाने क्या सोच रहा हैं,
यह हमें पता नहीं।
क्यों , निराश बैठा हैं,
क्यों यूं उदास बैठा है।
लेख़क : अशोक कुमार
कक्षा : ८
अपना घर , कानपुर

4 टिप्‍पणियां:

अशोक बजाज ने कहा…

सराहनीय रचना है .

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर कविता .....

रानीविशाल ने कहा…

सुन्दर रचना
अनुष्का

बेनामी ने कहा…

this poym is betiful.i like it