शनिवार, 13 नवंबर 2010

कविता : अच्छा बनना

अच्छा बनना
लोगों से मै विनती ,
एक ही बात मै उनसे करता....
पढ़-लिख कर अच्छा ,
कोई न अनपढ़ रहना....
लूट पात तुम कुछ न करना,
न ही किसी की हत्या करना....
लालच एक भी न करना,
चोरी से हरदम बचना....
पढ़-लिख कर अच्छा बनना,
कोई अनपढ़ रहना....
लेख़क : अशोक कुमार
कक्षा : , अपना घर

2 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

बहुत अच्छी बात बताती कविता......

Aryan1111 ने कहा…

yaar aap to dhoom macha rahe ho.
aap to kisi bhi umdaa professionalist ki tarah likhate ho.