गुरुवार, 11 नवंबर 2010

कविता : मानव भी दानव हो गया

मानव भी दानव हो गया
क्या हो रहा हैं इस संसार में ,
कैसा शोर मचा हैं इस संसार में ....
अब क्या होगा इस संसार का,
मैं सब यह सोच रहा हूँ .....
मानव
भी दानव हो गया हैं ,
अब खेत भी खलिहान हो गये ....
पहले खेतों में होती थी हरियाली,
मानव के अन्दर आ जाती थी खुशहाली .....
लेकिन अब कहाँ होती हैं हरियाली,
अब मानव की बात हैं निराली .....
लेख़क : ज्ञान कुमार
कक्षा :
अपना घर , कानपुर

3 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

सुंदर बात कहती कविता......

रानीविशाल ने कहा…

भैया आपकी सोच बहुत गहरी है जो सभी को सोचने पर विवश करती है . सच्ची बात कही
अनुष्का

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...आभार