मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

कविता :-समान अधिकार

समान अधिकार 
लड़का हुआ तो ढ़ोल बजाया....
लड़की हुई तो मातम छाया,
लड़की का उसमें दोष है। क्या....
लड़का और लड़की में तो,
फर्क हमने ही किया है....
लड़की को एक बार मौका,
अजमाने तो दीजिये....
उसको समाज में आगे,
एक बार आने तो दीजिये....
उसको अपना हुनर दिखाने तो दीजिये,
उसकी अपनी भी इच्छाएं है....
पूरा करने का मौका दीजिये,
लड़का और लड़की होने पर....
हम समान ख़ुशी में ढ़ोल बजायेंगे,
दोनों को समान अधिकार हम दिलवायेगें....
तभी तो एक साथ दोनों आगे बढ़ पायेगें,
नाम :-मुकेश कुमार 
कक्षा :10 
अपना घर   

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

कविता :-अँधेरी रात

अँधेरी रात
रात के अँधेरे में ....
दिन के सवेरों में ,
मैं सो रहा था ....
अचानक सपनों में ख्याल आया,
हमें उड़ते हुए पक्षियों का ध्यान आया....  
अपने जिन्दगी का एक सवाल उठाया,
तुम कब तक ऐसे जाते रहोगे....
क्या तुम मंजिल पाओगे,
होनी चाहिए कोई एक ख्वाइस....
जिसमें हो मंजिल और लक्ष्य का रहस्य,
नाम :लवकुश कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर
 

कविता :-बीते पल

बीते पल 
बीते हुए वो पल....
अभी भी याद आते है,
अच्छी ख़ुशी में भी....
वो हमें रुलाते है,
उस समय थी किसी से....
यारी किसी से दोस्ती,
लेकिन आज इस मेले में.... 
है केवल कवियों की गोष्ठी,
आज भी हमें उनकी....
शक्लें याद आती है,
कभी-कभी चेहरे पर मेरे....
मुस्कान दे जाती है,
पल वो कोशिश करते हैं याद आने की....
पल वो कोशिश करते है रुलाने की, 
नाम :-सोनू कुमार 
कक्षा :10 
अपना घर   

रविवार, 22 अप्रैल 2012

कविता :-देश की आजादी

देश की आजादी
सरसों के खेत में दौड़ रहे हो बच्चे....
देश के भविष्य और मन के हैं सच्चे,
लेकर झंडा सब हाथ में.... 
दौड़ रहे सब मिलकर साथ में, 
झंडा हवा में लहराता है....
देश में फहराया जाता है,
ये तिरंगा देश की शान है....
तिरंगा से भारत महान है,
देश की आजादी को....
फिर से आजाद करना है,
झंडा लेकर साथ में हमको....
लाल किले पर फहराना है,
नाम :-जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा :-8 
       अपना घर     
 

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

कविता :-रंग दे बसंती

रंग दे बसंती 
रंग दे बसंती चोला....
हर जगह शहीदों का टोला,
नव वर्ष की इस बेला....
उन शहीद वीरों का मेला,
जिन शहीदों ने अपनी जान पर खेला....
शहीदों के मेले जायेंगे,
अब हर वर्ष हम मनाएंगे....
जोश भरा रग-रग,
दुश्मन को मार गिराएंगे....
अब लगेगा हर वर्ष शहीदों का मेला,
मेरा रंग दे बसंती चोला....
नाम :चन्दन कुमार 
कक्षा :-6 
अपना घर 
                                                                                                                                         

कविता :-अचानक

अचानक 
एक दिन अचानक....
तूफान आया भयानक,  
उस तूफान के चपेट में.... 
बहुत से लोग फंस गए,
जो थे अपने खेत खलियान में....
उड़ गये वो आसमान में,
 जो गए थे अपने घर से....
घर का जीवन चलने के लिए,
वो भी नहीं वापस आ पाए....
अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए,
अचानक ही सब हो जाता है....
किसी का सपना मुश्किल ही पूरा हो पता है....
एक दिन में ही अचानक,
यह घटना बड़ी हो गई भयानक....
पता नहीं इस संसार में,
जीवन है किसका कितना....
अचानक ही सब होता है,
अचानक में ही कुछ न कुछ खो जाता है....
नाम :-ज्ञान कुमार 
कक्षा :-8 
अपना घर     
 

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

कविता :-सरकार हमारी है

सरकार हमारी है 
आज के इन नेताओं से....
और उनके कार्यकर्ताओं से,
परेशान हर व्यापारी है....
क्या करें ,सरकार हमारी  है,
लोग भी अब गरीब हो रहे....
गरीबी का बोझा ढ़ो रहे, 
घर घर यही बीमारी है....
क्या करें ,सरकार हमारी है,
घूँस के बल आज खड़े हैं....
घूँस से ही पले बढ़े हैं,
हर नेता अब भ्रष्टाचारी है....
क्या करें ,सरकार हमारी है,
होने न देंगे अब भ्रष्टाचार....
होगा न  किसी पर अब अत्याचार, 
संघर्ष हमारा ये जारी है....
क्या करें ,सरकार हमारी है, 
नाम :-धर्मेन्द्र कुमार 
कक्षा :-9 
अपना घर 

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

कविता :-हम कुछ कर दिखाएगें

हम कुछ कर दिखाएगें
आज भी वहाँ पल रहे हैं....
हजारों नन्हे-मुन्ने छोटे-छोटे बचपन,
जहाँ चल रहीं हैं सर्द हवाएँ....
और झूम रहा है उसमें कण-कण,
आज भी वे ठिठुर रहें हैं....
इन ठंड भरी हवाओं में,
कुछ भट्टों में तो....
कुछ उन्ही घास से बने गाँवो में,
या आज फिर भूल रहें हैं हम....
उन हवाओं और उन गलियों को,
जहाँ गुजरा था हमारा बचपन....
और ईंट की उन भट्ठिओं को,
कोई साथ दे अगर....
इन कठिनाईयों से भरी राहों में,
तो हम कुछ कर दिखायेंगे....
इन वादों और आशाओं में,     
नाम :सोनू कुमार 
  कक्षा :10 
अपना घर

कविता :-गुजरती जिन्दगी

गुजरती जिन्दगी 
हर किसी का बचपन खो जाता है....
पता कहाँ जाकर सो जाता है,
चाह कर भी ढूंढा नहीं जा सकता....
सिवाए पछतावे के आलावा कुछ नहीं किया सकता,
बचपन से जवानी आ जाती है....
जवानी के आते ही नई कहानी आ जाती है,
इस कहानी की रचना करते-करते....
जवानी बुढ़ापे में बदल जाती है,
तब न पेट में आंत होती न मुंह में दांत होता....
सिवाए मरने के अलावा राम का नाम होता,
हर किसी का बचपन खो जाता है....
पता कहाँ जाकर सो जाता है,
नाम :-सागर कुमार 
कक्षा :8 
अपना घर 

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

कविता :-नींद

नींद 
नींद क्यों आती है हमें 
सोने के लिए बुलाती है हमें   
नींद  सपनें में क्यों ले जाती है हमें 
नींद सपना क्यों दिखाती है हमें 
नींद क्यों आती है हमें
सोचों नींद न आती हमारे पास 
तो सोते न माता पिता की गोद में आज 
नींद के बिना है जिन्दगी अधूरी 
नींद के आने से रातें होती हैं पूरी 
नींद की अपनी एक भाषा है 
नींद की अपनी एक परिभाषा है  
नाम :मुकेश कुमार 
कक्षा :१०
अपना घर 

सोमवार, 16 अप्रैल 2012

कहानी :-पंडित की चतुराई

कहानी :-पंडित की चतुराई 
बहुत समय पहले की एक बात है। किसी एक पास के गाँव में एक पंडित रहता था। और वह पंडित पूरे गाँव में प्रसिद्ध था। इसके अलावा लोग दुसरे पंडितों को पूंछते भी नहीं थे।यह पंडित गाँव का सबसे अमीर पंडित माना जाता था। एक बार उसके घर में एक आदमी आ गया और कहने लगा की पंडित जी आज मेरे घर में कथा करनी है। वह पंडित बोला की ठीक जितने समय आना हो समय बता दीजियेगा मैं उतने ही समय आ जाऊंगा। आदमी नें कहा जब आप खाली हों तब ही चले आइयेगा। पंडित रात भर सोता नहीं था। वह सुबह-सुबह पांच बजे अपना बोरिया बिस्तर बाँधकर उस आदमी के गेट पर पहुँच गया और उनका गेट खड़खडानें लगा। कुछ ही देर में उस आदमी की नींद खुली उसनें देखा कि अरे पंडित जी आप इतनी सुबह ! यंहा पर पंडित नें बोला आपनें ही तो कहा  था। जब आपको समय मिलेगा तभी चले आना इसलिए मैं चला आया पंडित उस आदमी के ऊपर बहुत गुस्साया और घर वापस चला गया। पंडित बड़ा उदास हुआ। कुछ दिन बाद फिर वही  आदमी पंडित के घर आया और बोला पंडित जी राम-राम पंडित गुस्सा कर बोला क्या है? आदमी नें कहा पंडित जी कथा करनी है। पंडित नें कहा ठीक है और समय बता जाओ कब आना है। उस आदमी नें कहा दोपहर को आ जाना पंडित जी अगले दिन पंडित जी दोपहर को उसके घर पहुँचा। पंडित जी बोले जल्दी-जल्दी दान दक्षिणा करो कथा शुरू किया जाये। पूजा का सारा सामान पंडित जी के पास रख दिया गया। पंडित बोला आप सभी पांच मिनट के लिए अन्दर चले जाएँ मैं थोडा-थोडा पूजा का सामान जरा झोले में रख लूँ। तत्पश्चात, उस झोले की पूजा करके सारा सामान बाहर निकालूँगा। उसी समय सभी लोग अन्दर हो गए। पंडित को रास्ता खाली दिखा तो पंडित नें सारा सामान भरा और झोला उठाया। पांच मिनट में पंडित गायब हो गया । जब पंडित गायब हो गया तो उस आदमी को बड़ा गुस्सा आ रहा था । उधर पंडित तो मन ही मन  मुस्कुराता हुआ घर पंहुचा। जब आदमी पंडित के घर पंहुचा तो पंडित बोला तूनें मुझे कितनी बार परेशान किया है।बालक ये उसी कर्म का फल है। पंडित नें कहा जो व्यक्ति मेरे साथ ऐसा व्यव्हार करता है। मैं उसे ऐसे ही सिखलाता हूँ। इसलिए मेरा नाम चतुर पंडित रखा है।

शिक्षा :-कभी भी किसी को धोखा नहीं देना चाहिए 

नाम :-जीतेन्द्र कुमार 
कक्षा :-८
अपना घर