कविता :ज्ञान कुमार बाल कवितायेँ बाल कहानियाँ बाल गीत बालकहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कविता :ज्ञान कुमार बाल कवितायेँ बाल कहानियाँ बाल गीत बालकहानी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 21 अप्रैल 2012

कविता :-अचानक

अचानक 
एक दिन अचानक....
तूफान आया भयानक,  
उस तूफान के चपेट में.... 
बहुत से लोग फंस गए,
जो थे अपने खेत खलियान में....
उड़ गये वो आसमान में,
 जो गए थे अपने घर से....
घर का जीवन चलने के लिए,
वो भी नहीं वापस आ पाए....
अपने परिवार को आगे बढ़ाने के लिए,
अचानक ही सब हो जाता है....
किसी का सपना मुश्किल ही पूरा हो पता है....
एक दिन में ही अचानक,
यह घटना बड़ी हो गई भयानक....
पता नहीं इस संसार में,
जीवन है किसका कितना....
अचानक ही सब होता है,
अचानक में ही कुछ न कुछ खो जाता है....
नाम :-ज्ञान कुमार 
कक्षा :-8 
अपना घर     
 

शुक्रवार, 26 मार्च 2010

कविता कबूतर ताल किनारे

कबूतर ताल किनारे
एक कबूतर ताल किनारे,
रहता था चीटे के संग......
एक बार शिकारी आया ताल किनारे,
कबूतर था शिकारी के ताक में....
शिकारी ने अपना जाल बिछाया,
उसके आँगन में.....
चीटी ने पहले बताया था,
की तुम्हारे आंगन में.....
शिकारी ने जाल लगाया हैं,
जिससे कबूतर न आया अपने आँगन में.......
अपना घर बनाया दूसरे पेड की डाल में.....
लेखक ज्ञान कक्षा अपना घर कानपुर

गुरुवार, 11 मार्च 2010

कविता: रंग -बिरंगी चिड़ियाँ

रंग -बिरंगी चिड़ियाँ

रंग -बिरंगी चिड़ियाँ आयें ।
पूरब से पश्चिम को जायें ॥
जो -जो चिड़ियाँ न उड़ पायें ।
धरती पर वो नाचे -गायें ॥
रंग -बिरंगी चिड़ियाँ आयें ।
उड़ -उड़ कर वो नदी में जायें ॥
वहां पर अपनी प्यास बुझायें ।
रंग -बिरंगी चिड़ियाँ आयें ॥

लेखक :ज्ञान कुमार, कक्षा , अपना घर

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

कविता -खगोल वैज्ञानिक अनमोल

खगोल वैज्ञानिक अनमोल
खगोल वैज्ञानिक हैं अनमोल ,
करते रहते प्रथ्वी को पोल ।
न जाने क्या करते खोज ,
करते हैं प्रथ्वी के ऊपर बोझ ।
इस बोझ से पता नहीं क्या होयेगा ,
इस प्रथ्वी से पता नहीं क्या खोएगा ।
खगोल वैज्ञानिक प्रथ्वी की खोलते पोल ,
२०१२ का बजाते रहते ढोल ।
खगोल वैज्ञानिक हैं अनमोल ,
करते रहते प्रथ्वी को पोल ।
लेखक : ज्ञान कुमार
कक्षा :
अपना घर