शुक्रवार, 21 मई 2010

कविता :बिजली

बिजली
सुनो यारो देखो यारो
हर गाँव में हर शहर में ॥
रहते हैं हजारो गाँव अँधेरे में ।
अगर बिजली को पाना हैं
यह बात बिजली कर्मचारी को बताना हैं ।
की पैसा तो बहुत लेते हो
फिर बिजली क्यों नहीं देते हो ।
सुनो यारो देखो यारो
हर गाँव में हर शहर में
रहते हैं हजारो गाँव अँधेरे में ॥


लेखक :सागर कुमार
कक्षा :
अपना घर

गुरुवार, 20 मई 2010

ram

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कविता :परियों की रानी

परियों की रानी
सपनों की कहानी
जिसमें थी परियों की रानी
रानी के पास थी जादू की छड़ी
चार दासी थीं उनके पास खड़ीं
हमको भूख लगी जोरों की
रानी ने ढेर लगा दी बर्फी की
बर्फी इतनी खायी,मुँह से एक जम्हाई आयी ।
जिससे प्रथ्वी पर रहने वालों की नींद भाग गयी
तभी पता चला कि यह तो एक सपना था
उस समय मैं तो बहुत ही भूखा था

लेखक :आशीष कुमार
कक्षा :
अपना घर

बुधवार, 19 मई 2010

कविता सपना

सपना
एक दिन मैंने देखा था ,
आसमान में कई रंग मिले थे....
लाल गुलाबी पीले आसमानी,
इन सब रंगों में से था....
लाल रंग बड़ा अभिमानी,
अपने को बड़ा दिलदार समझता....
बाकी को फुट पात समझता,
एक दिन जब बादल ने गरजा....
सब रंगों में तब हो गयी लड़ाई,
तब नहीं रहा कोई किसी का भई....
बादल ने जब बरसाया पानी,
सब रगों की हो गयी हैरानी....
एक दिन मैंने देखा था,
आसमान में कई रंग मिले थे....
लेखक ज्ञान कक्षा अपना घर कानपुर

मंगलवार, 18 मई 2010

साबुन की बात निराली
साबुन की हैं बात निराली ,
कोई होती हैं काली तो कोई रंगीली ....
बड़े -बड़े लोग साबुन को खूब लगते हैं,
शरीर को साफ करते हैं....
बहुत लोग एसे हैं जो साबुन,
से कोसो दूर रहते हैं....
साबुन का हैं दूसरा रूप,
आम लोग जिसको कहते हैं मिट्टी....
इसे मिटते नहीं कहना भाई,
ये गरीबो के लिए हैं....
अमिरित के सामान भाई .....
लेखक सागर कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

सोमवार, 17 मई 2010

कविता: पानी को अगर हम बचायेंगे नहीं.


पानी बिन मरेंगे हम एक दिन यंही

कितना पानी शेष बचा हैं,
कोई नहीं इसे जनता हैं....
भारत में बहुत से वासी हैं,
उसमे आधी जनता अभी भी प्यासी हैं....
मानव का जीवन हैं पानी,
हम सब बरबाद न करे एक भी पानी.....
पानी आओं हम बचाये,
व्यर्थ न करे इसको और बढ़ाये....
इसे बचाओ हम भारत वासी मिलकर,
पानी बरबाद न होने दे समझकर ....
पानी हैं सब का जीवन,
पानी को अगर हम बचायेंगे नहीं ,
पानी बिन मरेंगे हम एक दिन यंही....
लेखक आशीष कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

रविवार, 16 मई 2010

कविता -पानी को बचाओ

पानी को बचाओ

कितना पानी शेष बचा है ।
कोई नहीं इसे जाँचता है ॥
भारत में बहुत भारत वासी हैं ।
उसमें आधी जनता अभी भी प्यासी है ॥
मानव का जीवन है पानी ।
हम सब बर्बाद न करें एक भी पानी॥
आओ हम सब मिलकर कर पानी को बचाएं।
व्यर्थ न कर इसको और बढायें ॥
इसे बचाएं हम भारत वासी मिलकर ।
पानी बर्बाद न होने दें जीवन समझकर ॥
पानी है सबका जीवन साथी ।
पानी को बचाओ ,नहीं मर जायेगें सब एक दिन ॥

लेखक : आशीष कुमार
कक्षा :
अपना घर

शनिवार, 15 मई 2010

कविता दुनियां है बड़ी

दुनियाँ है बड़ी
देखों क्या है ए दुनियाँ ,
सब कोई मनमानी करते दुनियाँ में....
सब कोई रहते दुनियाँ में,
दुनियाँ में से कोई चले जाते हैं....
दुनियाँ का नाम लेकर रह जाते हैं,
दुनियाँ हैं देखो कितनी बड़ी....
आदिमानव ने नहीं पहनी कभी घड़ी,
दोखो क्या हैं ए दुनियाँ .....
लेखक चन्दन कुमार कक्षा अपना घर कानपुर

शुक्रवार, 14 मई 2010

कविता - डाक्टर आये

डाक्टर आये

डाक्टर आये डाक्टर आये,
साथ में अपने आला लाए।
ह्रदय की तरफ आला लगते है,
तब दर्द और बुखार का पता लगते है।
रात को कुछ हो जाता है,
डाक्टर सुई लगता है,
साथ में दवा दे जाता है।

नाम - जमुना कुमार
कक्षा - पांच

गुरुवार, 13 मई 2010

कविता -पेड़ लगाओ

पेड़ लगाओ

पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ ।
सब बच्चों तुम पेड़ लगाओ ॥
पेड़ लगाकर पानी बरसाओ ।
पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ ॥
पेड़ हमें आँक्सीजन गैस देते हैं ।
और कार्बनडाई-आक्साइड लेते हैं ॥
बच्चों तुम सब पेड़ लगाओ ।
पेड़ हमारे लिए हैं उपयोगी ॥
पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ ।
बच्चों तुम सब पेड़ लगाओ ॥

लेखक -जमुना कुमार
कक्षा -
अपना घर

शनिवार, 8 मई 2010

कविता -नया सवेरा

नया सवेरा
हुआ सवेरा निकला सूरज ,
पक्षी खेतों में जाते हैं....
खेतों में जाकर दाना खूब खाते हैं,
जब दुपहर हो जटी हैं....
पेड़ों में पक्षी बैठते हैं,
शाम को सूरज ढलता हैं....
सब पक्षी घर को जाते हैं,
बच्चों के साथ रहते हैं.....
चैन की नींद सोते हैं,
हुआ सवेरा निकला सूरज......
पक्षी खेतों में जाते हैं....

लेखक -सागर कुमार
कक्षा -६
अपना घर