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गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

कविता : आधी आजादी

 आधी आजादी 

हो गई है देश की आजादी ,
छा गया है फिर से अन्धेरा....
सोचा था कि कुछ पल कुछ दिन जी लूँ ,
करू रात को दिन जैसा उजियारा .....
पर चोर और बदमाश नेताओं ने ,
फिर से इस उजियारे को घेरा ....
गुलामी से आजादी मिली ,
फिर आजादी वो भी काली .....
फर्क बस इतना है कि ,
गोरे तो गए लेकिन काले आये......

लेखक : सागर कुमार 
कक्षा : 8
अपना घर 

शुक्रवार, 21 मई 2010

कविता :बिजली

बिजली
सुनो यारो देखो यारो
हर गाँव में हर शहर में ॥
रहते हैं हजारो गाँव अँधेरे में ।
अगर बिजली को पाना हैं
यह बात बिजली कर्मचारी को बताना हैं ।
की पैसा तो बहुत लेते हो
फिर बिजली क्यों नहीं देते हो ।
सुनो यारो देखो यारो
हर गाँव में हर शहर में
रहते हैं हजारो गाँव अँधेरे में ॥


लेखक :सागर कुमार
कक्षा :
अपना घर