मंगलवार, 10 मार्च 2026

ज़िंदगी तो पलभर का है

कविता 

ज़िंदगी तो पलभर का है 
कभी ख़ुशी का तो कभी दुखी का है 
कब बीत जाये पता ही नहीं 
क्या हो जाये खबर ही नहीं 
खो जये कब क्या ये पता ही नहीं 
ज़िंदगी तो पलभर का है 
कभी खुशी तो कभी कभी दुखी का है 
कभी गिरन तो कभी उठना है 
यही तो ज़िंदगी का सफर है 
    कभी ख़ुशी तो कभी दुखी का है 
ज़िंदगी तो पलभर का है
 कभी ख़ुशी तो कभी दुखी का है 
कवि -शिवा कुमार 
( अपना घर ) 
  



 

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