"कविता"
पहले देखा था माँ ने वो दिन
जब दुनिया लगती थी पूरी हरी भरी
जब से बढ गए लोग
तब से लगी दुनिया ख़तम पेडो से पूरी
पहले देखा था मेने वो दिन
जब दुनिया पूरी लगती हरी भरी
अब लोग बनाते पेड़ों को काटकर लकड़ी
काट काटकर लकड़ी
काट काटकर पेड़ों से लकड़ी ख़तम होने लगे पेड़ ही पुरे
पहले देखा था माँ ने वो दिन
जब दुनिया लगती पूरी हरी भरी
पहले देखा था माँ ने वो दिन
जब दुनिया लगती थी पूरी हरी भरी
जब से बढ गए लोग
तब से लगी दुनिया ख़तम पेडो से पूरी
पहले देखा था मेने वो दिन
जब दुनिया पूरी लगती हरी भरी
अब लोग बनाते पेड़ों को काटकर लकड़ी
काट काटकर लकड़ी
काट काटकर पेड़ों से लकड़ी ख़तम होने लगे पेड़ ही पुरे
पहले देखा था माँ ने वो दिन
जब दुनिया लगती पूरी हरी भरी
कवी अभिषेक कुमार
कक्षा : 7
कक्षा : 7
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