शनिवार, 21 मार्च 2026

कविता 

किसी  को किसी राह की मोड़ पर 
मिली वह चीज अनोखी सी 
चली कूछों के मन  तोड़ कर 
तो किसी -किसी की है जोड़ती 
वह न जाने क्या क्या कहते 
जाल में जिसकी जकड़ कर वह भी 
  अपनी गुप्तों को है खोलते 
किसी को  किसी राह पर ही क्यों 
अनोखी सी वह चीज मिली 



कवि - पिंटू कुमार 
कक्षा-10 
(अपना घर )




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