कविता
किसी को किसी राह की मोड़ पर
मिली वह चीज अनोखी सी
चली कूछों के मन तोड़ कर
तो किसी -किसी की है जोड़ती
वह न जाने क्या क्या कहते
जाल में जिसकी जकड़ कर वह भी
अपनी गुप्तों को है खोलते
किसी को किसी राह पर ही क्यों
तो किसी -किसी की है जोड़ती
वह न जाने क्या क्या कहते
जाल में जिसकी जकड़ कर वह भी
अपनी गुप्तों को है खोलते
किसी को किसी राह पर ही क्यों
अनोखी सी वह चीज मिली
कवि - पिंटू कुमार
कक्षा-10
(अपना घर )
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