मंगलवार, 26 अक्तूबर 2010

कविता : काले -काले बादल छाये

काले- काले बादल छाये

काले- काले बादल छाये,
बरसात का मौसम लाये....
रिमझिम- रिमझिम पानी बरसा,
छायी हैं खेतों में हरियाली....
बरसात की हर बूंदों में,
छिपा हैं शरबत का मीठा पानी.....
किसान भाई इसका करते खूब उपयोग,
लगाया करते इस मौसम में धान खूब.....
बरसात की हर बूंदों में,
छिपा हैं शरबत का मीठा पानी ....
काले- काले बादल छाये,
बरसात का मौसम लाये...
लेख़क : सागर कुमार
कक्षा :
अपना घर , कानपुर

1 टिप्पणी:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

कितनी सुंदर कविता....