सोमवार, 18 अक्तूबर 2010

कविता :यह था मुखिया का कहना

यह था मुखिया का कहना

आ गए इलेक्शन-आ गए इलेक्शन ,
मुखिया चले गाँव-गाँव वोट मांगन ....
हाथ जोड़े-पैर छुएं ,
सबके घर पर मुंह बनाए खड़े हुये ....
बोले दादी अम्मा वोट देना हमको ,
पेंशन,राशन सब दिलवाएंगे तुमको ....
झूंठ नहीं अब सच है कहना ,
सब वोट हमीं को देना सुन लो भाई बहना ....
मैं चुनाव जो जीता तो बनूंगा मुखिया ,
गावों में काम करवाउंगा बढिया से बढिया ....
नाली सड़क आदि सभी को बनवाऊंगा ,
विधवा पेंशन सबको दिलवाउंगा ....
दादी माँ आयीं बोली नहीं है घर में दाना ,
मेरे घर से उठवाकर लाओ बोरी राशन .....
यह था मुखिया का कहना ,
आ गए इलेक्शन-आ गए इलेक्शन .....

लेख़क :आशीष कुमार
कक्षा :
अपना घर

4 टिप्‍पणियां:

चैतन्य शर्मा ने कहा…

मजेदार कविता आशीष भैया

रानीविशाल ने कहा…

सुन्दर शब्दचित्र खीचा है आपने इलेक्शन का ....
अनुष्का

माधव( Madhav) ने कहा…

सुंदर

प्रतुल ने कहा…

आशीष जी, बेहद सुन्दर कविता है.