मंगलवार, 22 जून 2010

कविता : बादल

बादल

बादल आये बादल आये ।
काले-काले बादल आये ॥
काली-काली आंधी आती ।
बरसे पानी भर आते खेत ॥
मेढक बोलते टर्र-टर्र ।
पेड़ो पर बूंदे पड़ती झम-झम-झम ॥
फल गिरते टप-टप-टप ।
घर में जब पानी भर आता ॥
घर वाले हो जाते परेशान ।
इसलिय बोलती है हमारी नानी ॥
बंद हो जाए ये पानी ।
मुझे न कर इतनी परेशानी ॥
बादल आये बादल आये ।
काले-काले बादल आये ॥

लेखक :जितेन्द्र कुमार
कक्षा :
अपना घर

5 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

इन बदलो का इन्तजार तो सबको है बच्चो........प्यारी कविता

माधव ने कहा…

very nice poem

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी सुन्दर पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है!
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http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/06/3.html

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर व प्यारी कविता..बधाई.

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'पाखी की दुनिया' में 'पाखी का लैपटॉप'

यशवन्त माथुर ने कहा…

आज 21/01/2013 को आपकी यह पोस्ट (दीप्ति शर्मा जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!