रविवार, 5 जुलाई 2009

कविता: मेहनत का दर्द

मेहनत का दर्द
कच्ची कच्ची मिटटी खोदी ।
खोदकर पानी में फुला दी ॥
गोल करके फिर सांचे में डाली ।
ईट हुई गड़बड़ मालिक ने दी गाली॥
गाली सुनकर गुस्सा आया ।
गुस्से को मन में भड़काया ॥
तब पता चला मालिक होते है कंजूस।
गाली देकर मन को पहुचाते है ठेस ॥

आदित्य कुमार कक्षा ७, अपना घर

4 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

mehanat ka dard jyada hota hai.......

बीना ने कहा…

मेहनत से कमाये गये पैसेबहुत् कीमतीहोते हैं।

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

बेहतरीन... वाह..

GAURAV ने कहा…

ye bahut samvedansheel mudda hai....
aapne bahut khubsoorti ke likha hai