रविवार, 1 मार्च 2026

कविता: "उड़ने दो परिंदो को आसमान में"

"उड़ने दो परिंदो को आसमान में"
 उड़ने दो इन परिंदो को आसमान में। 
पंख फैलाने दो उनको जहाँन में ।। 
मेहनत से कब तक भागेंगे ये । 
इनको उड़ना तो पड़ेगा एकदिन ।। 
जीने के सफर में । 
फैलती इस बेसहारा दुनिया में ।। 
कबतक साथ चलेंगे इनके । 
कभी तो फ़ैलाने दो पंक उनको ।। 
उड़ने के लिए उँचे आसमान में । 
कद्र करना सीख पाऐंगे ।। 
मेहनत से खुद की अपनी । 
हर मेहनत का मतलब समझ जाऐगे ।। 
हाथ छोड़ दो इनका यहाँ पर । 
उड़ने दो इन परिंदो को आसमान में ।। 
पंख फ़ैलाने दो इनको जहाँन में ।
कवि: साहिल कुमार, कक्षा: 10th, 
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"