"उड़ने दो परिंदो को आसमान में"
उड़ने दो इन परिंदो को आसमान में।
पंख फैलाने दो उनको जहाँन में ।।
मेहनत से कब तक भागेंगे ये ।
इनको उड़ना तो पड़ेगा एकदिन ।।
जीने के सफर में ।
फैलती इस बेसहारा दुनिया में ।।
कबतक साथ चलेंगे इनके ।
कभी तो फ़ैलाने दो पंक उनको ।।
उड़ने के लिए उँचे आसमान में ।
कद्र करना सीख पाऐंगे ।।
मेहनत से खुद की अपनी ।
हर मेहनत का मतलब समझ जाऐगे ।।
हाथ छोड़ दो इनका यहाँ पर ।
उड़ने दो इन परिंदो को आसमान में ।।
पंख फ़ैलाने दो इनको जहाँन में ।
कवि: साहिल कुमार, कक्षा: 10th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"