रविवार, 22 फ़रवरी 2026

कविता: "एग्जाम के दिन"

"एग्जाम के दिन"
आया है एग्जाम के दिन। 
गुजर रहे है एक - एक दिन ।। 
सुबह से शाम तक कुछ पता नहीं है चलता । 
पुरे दिन किताबे पढ़ने में गुजरता । 
सपने आते राज एग्जाम के ही ।। 
दिन बचे है काम अभी अपने पास । 
पढ़ने है सारे विषय कभी - कभी ।। 
मन करता पढ़ने को  कभी कभी  । 
वैसे तो पूरा दिन सोते ही गुजरते है ।। 
पेपर के बाद वैसे भी कौन पढता है । 
आ गया है एग्जाम के दिन । 
गुजर रहे है एक - एक दिन ।। 
कवि: नसीब कुमार, कक्षा: 3rd,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

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