"एग्जाम के दिन"
आया है एग्जाम के दिन।
गुजर रहे है एक - एक दिन ।।
सुबह से शाम तक कुछ पता नहीं है चलता ।
पुरे दिन किताबे पढ़ने में गुजरता ।
सपने आते राज एग्जाम के ही ।।
दिन बचे है काम अभी अपने पास ।
पढ़ने है सारे विषय कभी - कभी ।।
मन करता पढ़ने को कभी कभी ।
वैसे तो पूरा दिन सोते ही गुजरते है ।।
पेपर के बाद वैसे भी कौन पढता है ।
आ गया है एग्जाम के दिन ।
गुजर रहे है एक - एक दिन ।।
कवि: नसीब कुमार, कक्षा: 3rd,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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