शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

कविता: "एग्जाम"

"एग्जाम" 
आ गया वो दिन जिसका महीनों से इंतजार था। 
दिन और रात को अब एक करना होगा ।। 
बंद कमरे में अकेले पढ़ना होगा । 
बहुत हो गए मजे अब हमें अब पढ़ना होगा।।  
१ - २ घंटा ही सही पर मन लगाकर पढ़ना है । 
कोई  काम नहीं करना है ।। 
किताबी कीड़ा अब बनना है । 
खेलना तो बंद हो ही गया है ।। 
अब तो उलटी गिनती भी गिनना सुरु हो गया है । 
इंतजार की घड़ी आ चली है ।। 
 आज ही हमारा अंग्रेजी का एग्जाम है । 
टारगेट तो 75 + का है । 
जिसका सदियों से थे इंतजार अब वो दिन आ गया है ।। 
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपूर केंद्र. "अपना घर"


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