"एग्जाम"
आ गया वो दिन जिसका महीनों से इंतजार था।
दिन और रात को अब एक करना होगा ।।
बंद कमरे में अकेले पढ़ना होगा ।
बहुत हो गए मजे अब हमें अब पढ़ना होगा।।
१ - २ घंटा ही सही पर मन लगाकर पढ़ना है ।
कोई काम नहीं करना है ।।
किताबी कीड़ा अब बनना है ।
खेलना तो बंद हो ही गया है ।।
अब तो उलटी गिनती भी गिनना सुरु हो गया है ।
इंतजार की घड़ी आ चली है ।।
आज ही हमारा अंग्रेजी का एग्जाम है ।
टारगेट तो 75 + का है ।
जिसका सदियों से थे इंतजार अब वो दिन आ गया है ।।
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपूर केंद्र. "अपना घर"
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