"माँ तेरी याद आज आ रही है"
माँ तेरी याद आज आ रही है।
ना जाने क्यों आँखो से आसु आने लगे है ।।
तेरी ममता याद आ रही है ।
वो बचपन भी याद आ रहा है ।।
जब मैं बालू में खेला करता था और आप डाटती थी।
जब तेरे हाथों के बना खाना खाता था।।
तेरे बनाए पकवान दोस्तों के बाट कर खाया करता था।
होली के दिन भर पेट खता था गुजिया और पकोड़ी ।।
दिन भर तो घूमना होता था ।
बिन बताए बाहार भाग अक्सर जाय करता था ।।
मार तो हमेश तुमसे कहता था ।
पर मैं नहीं मानता था ।।
बिन बताए बाहार भाग अक्सर जाय करता था।
तुमसे आज बात होगी न, जाने मेरी माँ कैसी होगी ।।
तुझसे न जाने कब मिलूँगा ।
माँ तेरी याद आज आ रही है।
ना जाने क्यों आँखो से आसु आने लगे है ।।
कवि: निरु कुमार, कक्षा: 9th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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