"काले बादल"
आने लगे है अब काले बादल।
आसमा अब काला हो चूका है ।।
गरज रहे है बादल आसमा में ।
बिजली भी चमक रही है जोर - जोर से ।।
छाता का इस्तेमाल होने लगे एक तरफ से से ।
बरसा रहे है अब पानी की बुँदे ।।
हर गली हर गाँव नया दिखने लगा अब ।
नाच रहे है अब मोर कर के खूब सोर ।।
सब कुछ धूल गया हो मानो ।
आँखे खुल गई हो मनो ।।
बारिश हो रही है खूब ।
आते जा रहे है काले बादल ।।
आने लगे है अब काले बादल।
आसमा अब काला हो चूका है ।।
कवि: अजय II, कक्षा: 6th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"
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