शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

कविता: "लक्ष्य"

"लक्ष्य" 
इरादे छोटे है हमारे।  
छोटे - छोटे डेग को जब हम बढ़ाते है ।। 
हम कुल जैसे भरते जान है । 
भले ही नाजुक सोच हमारी है।।  
लक्ष्य को हमारे गले लगाने का विचार गहरे है । 
पहुँचेंगे मुकाम पर अपने ।। 
यह हमने भी किया है तय । 
रहना है हरहाल में पाकर ।। 
इस विषय पर हमें विजय। 
कवि: अजय II, कक्षा: 6th,
आशा ट्रस्ट, कानपुर केंद्र. "अपना घर"

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