रविवार, 5 अगस्त 2018

कविता : काश बारिश हो

" काश बारिश हो "

आशा है मुझे , बारिश होगी,
आशा है मुझे , कुछ नया होगा |
देखने में लगता है कुछ खास,
ये बादल रुक जाए काश |
जहाँ भी जाऊँ बादल हो साथ,
मेरे चारों तरफ हो जाए बरसात |
बारिश की बूंदों को मैं देखूँ,
बारिश  को मैं महसूस करूँ |
उछल कूदकर खूब नहाऊँ,
इतना पानी हो की मैं डूब जाऊँ |
काश बारिश यहीं पर हो,
खुदा से यही दुआ मनाऊँ | 

कवि : नितीश कुमार , कक्षा : 8th , अपना घर



कवि परिचय : यह हैं नितीश जो की बिहार के रहने वाले हैं | नितीश को टेक्नोलॉजी  में बहुत रूचि है | नितीश कवितायेँ लिखने में माहिर है | नितीश बड़े होकर अपने समाज और घर वालों की मदद करना चाहते हैं | 

1 टिप्पणी:

Sagar ने कहा…

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